पंजाब के किसान संगठनों के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। भारतीय किसान यूनियन के नेता बलबीर सिंह राजेवाल द्वारा किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंढेर पर लगाए गए आरोपों पर कमेटी ने कड़ा पलटवार किया है। कमेटी ने राजेवाल की बयानबाजी को तथ्यहीन बताते हुए उन्हें सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि पिछले लगभग पांच वर्षों से उनके संगठन के खिलाफ अधूरी जानकारी या किसी एजेंडे के तहत बयानबाजी की जा रही है। इससे किसान संगठनों की एकता प्रभावित हो रही है और संगठन की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है। कमेटी ने राजेवाल से ऐसी बयानबाजी से बचने और किसान-मजदूर संघर्ष की एकता को कमजोर न करने की अपील की। कमेटी ने राजेवाल के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के कार्यकर्ता 2020 के किसान आंदोलन के दौरान लगभग 20 दिन बाद सिंघू बॉर्डर पहुंचे थे। कमेटी के नेताओं ने दावा किया कि उनके संगठन के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के काफिले 27 नवंबर 2020 को अमृतसर से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे और 29 नवंबर को सिंघू बॉर्डर पहुंच गए थे। इसके समर्थन में उन्होंने उस समय की अखबारों की खबरों, सुर्खियों और वीडियो फुटेज का हवाला दिया। उन्होंने 29 नवंबर 2020 को दिल्ली के अलीपुर थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 813 का भी जिक्र किया। कमेटी ने यह भी कहा कि वे बीकेयू एकता उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां की 29 नवंबर को सिंघू बॉर्डर पर किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के मंच पर पहुंचने की तस्वीर और वीडियो क्लिप भी जारी करेंगे। राजेवाल द्वारा किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पर सरकार के साथ मिलीभगत कर ‘बत्तियां वाले चौक’ पहुंचने के आरोप पर भी कमेटी ने जवाब दिया। नेताओं ने कहा कि यदि राजेवाल के पास इस संबंध में कोई ठोस सबूत है तो वह उसे सार्वजनिक करें। कमेटी ने दोहराया कि वह हर तथ्य की जांच और सार्वजनिक चर्चा के लिए तैयार है। 26 जनवरी की घटना पर भी दी सफाई 26 जनवरी 2021 की घटनाओं को लेकर कमेटी ने कहा कि इस मामले में भी तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। नेताओं के मुताबिक, संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से कार्यक्रम में लगातार बदलाव के बाद रिंग रोड पर जाने की जो कॉल दी गई थी, उसी के अनुसार संगठन ने कार्रवाई की थी। कमेटी ने कहा कि इस मामले को बार-बार अलग रूप में पेश कर लोगों को गुमराह करना बंद किया जाना चाहिए। ‘मोगा रैली के एकता प्रस्ताव’ का दिया हवाला किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने मोगा रैली के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा पारित एकता प्रस्ताव का भी हवाला दिया। नेताओं ने कहा कि प्रस्ताव में स्पष्ट था कि एकता बनाए रखने के लिए कोई भी पक्ष सार्वजनिक तौर पर पिछली घटनाओं को लेकर दूसरे संगठन के खिलाफ टिप्पणी नहीं करेगा। कमेटी का आरोप है कि राजेवाल लगातार इस भावना के विपरीत बयान दे रहे हैं। नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा को भी इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। दो साल पहले बातचीत की कोशिश का दावा कमेटी ने कहा कि करीब दो साल पहले भी राजेवाल तक तथ्य पहुंचाने और इन मुद्दों पर बातचीत करने का प्रयास किया गया था, लेकिन उस समय भी उन्होंने बातचीत के लिए सहमति नहीं दी। इसके बावजूद सार्वजनिक मंचों से संगठन के खिलाफ बयानबाजी जारी रही। नेताओं ने आरोप लगाया कि अंदरूनी बैठकों में एकता को नुकसान पहुंचाने वाली बयानबाजी से बचने की बात की जाती है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर इसके विपरीत बयान दिए जाते हैं। ऐसी दोहरी नीति किसान आंदोलन के लिए नुकसानदायक है। अब चुप नहीं रहेगा संगठन किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में किसान-मजदूर एकता और संघर्ष के बड़े हित में संगठन ने सार्वजनिक रूप से हर आरोप का जवाब देने से जानबूझकर परहेज किया। लेकिन यदि इसी तरह की बयानबाजी जारी रही तो संगठन तथ्यों और सबूतों के साथ अपना पक्ष और मजबूती से सार्वजनिक करने के लिए मजबूर होगा। राजेवाल को खुली बहस की चुनौती कमेटी ने अंत में बलबीर सिंह राजेवाल को मीडिया की मौजूदगी में आमने-सामने बैठकर सभी मुद्दों पर खुली चर्चा करने का न्योता दिया। नेताओं ने कहा कि यदि राजेवाल अपने आरोपों पर कायम हैं तो वह सार्वजनिक बहस के लिए सामने आएं और दोनों पक्ष अपने-अपने सबूत जनता के सामने रखें। कमेटी ने कहा कि किसान संगठनों की एकता पंजाब और देश के हित में जरूरी है। इस एकता को कमजोर करने वाली हर बयानबाजी और कोशिश का तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा।
