अजमेर के रूपनगढ़ से ट्रैक्टर रैली लेकर निकले किसानों को अजमेर में एंट्री से पहले ही रोक लिया गया है। किसान सिंगला बांध के भूमि अवार्ड निरस्त करने की मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन देने जा रहे थे। पुलिस ने अजमेर में एंट्री से पहले ही लोहागल के पास पुलिस जाब्ता तैनात कर उनको रोक लिया है। ट्रैक्टर रैली में करीब 96 ट्रैक्टर हैं और रैली की जानकारी मिलते ही पुष्कर की पूर्व विधायक नसीम अख्तर इंसाफ भी मौके पर पहुंच गई है। मौके पर पहुंचे रूपनगढ़ एसडीएम रामकुमार टाडा ने किसानों के साथ बैठ कर वार्ता शुरू की है। रूपनगढ़ एसडीएम रामकुमार टाडा ने वार्ता के लिए 20 किसानों को शास्त्री नगर थाने में बुलाया है। इस बैठक में कोई सहमति नहीं बनी। इसके बाद अजमेर में जिला कलेक्टर से किसानों के एक शिष्टमंडल (पांच लोग) की वार्ता हुई, जिसमें किसानों की मांगों को सरकार के समक्ष भेजने पर सहमति बनी। वार्ता में किसानों को पूर्व में मिलने वाले सभी कार्य पूर्ववत जारी रखने का भी आश्वासन दिया गया। किसान नेता गोविन्द प्रताप सिंह सिंगला ने बताया कि जिला कलेक्टर के साथ हुई वार्ता में मांगों को लेकर आश्वासन मिला है। अब गुरुवार (13 अगस्त) को धरना स्थल पर सभी प्रभावित किसानों की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। इसके बाद ही धरना समाप्त करने या जारी रखने का फैसला किया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार, रूपनगढ़ के सिंगला बांध पर पिछले 20 दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे किसानों ने बुधवार को ट्रैक्टर रैली निकालकर अजमेर कूच किया। सिंगला बांध से 96 ट्रैक्टरों के साथ किसान अजमेर कलक्ट्रेट में जिला कलेक्टर को ज्ञापन देने के लिए रवाना हुए। रैली के अजमेर पहुंचने से पहले ही शास्त्रीनगर थाना पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर किसानों को रोक दिया। 100 पुलिसकर्मी, जेसीबी, डंपर से रोका रास्ता
किसानों की ट्रैक्टर रैली को रोकने के लिए शास्त्रीनगर थाने के पास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। मौके पर करीब 100 पुलिसकर्मियों के साथ एक डंपर और एक जेसीबी भी खड़ी की गई। पुलिस ने ट्रैक्टरों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद मौके पर किसानों और पुलिस के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ। 20 दिनों से दे रहे हैं धरना
किसान सिंगला बांध पर पिछले 20 दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि लंबे समय से मांगों को लेकर आंदोलन चल रहा है, लेकिन समाधान नहीं होने के कारण अब ट्रैक्टर रैली के माध्यम से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का निर्णय किया गया। किसानों का प्रतिनिधिमंडल अजमेर कलक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपना चाहता है। ये है मामला
सिंगला बांध के भराव क्षेत्र की कृषि भूमि के अवार्ड को लेकर चल रहा किसानों का आंदोलन अब आक्रोश के चरम पर पहुंच गया है। मामले के अनुसार वर्ष 1993-94 में सींगला बांध का निर्माण किसानों और क्षेत्र की जलापूर्ति के उद्देश्य से किया गया था। उसी समय भराव क्षेत्र की करीब 2500 बीघा भूमि सिंचाई विभाग के नाम अवार्ड की गई और प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा भी निर्धारित किया गया। वर्षों तक किसानों को इस प्रक्रिया की जानकारी नहीं मिली और भूमि से जुड़े नामांतरण, विरासत, खरीद-फरोख्त तथा केसीसी जैसे कार्य सामान्य रूप से चलते रहे। हाल ही में मोरसागर बांध निर्माण और आनासागर का अतिरिक्त पानी सिंगला बांध तक लाने की प्रक्रिया शुरू होने के दौरान किसानों को जानकारी मिली कि उनकी भूमि पहले ही अवार्ड हो चुकी है। इसके बाद प्रभावित किसानों ने 25 जुलाई से सिंगला बांध पर धरना शुरू किया। मंत्री सुरेश रावत ने भी की थी चर्चा
2 अगस्त को जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल से करीब दो घंटे तक चर्चा की और भराव क्षेत्र की भूमि का अवार्ड निरस्त कराने का मामला मंत्रिमंडल में रखने का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने नामांतरण, विरासत और केसीसी जैसी प्रक्रियाएं पूर्ववत जारी रखने की बात भी कही। मंत्री के निर्देश पर प्रशासन ने आंदोलनकारियों द्वारा दिए गए दो विरासत प्रकरणों की प्रक्रिया शुरू कर उनका निस्तारण भी कर दिया। आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि जब तक भूमि अवार्ड निरस्त करने सहित सभी मांगों पर ठोस और लिखित समाधान नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। देखें प्रदर्शन से जुड़े PHOTOS
