डूंगरपुर में 8वीं कक्षा के स्टूडेंट विकास ननोमा के सीने में तीर घुस गया। स्कूल के तीरंदाजी कोर्ट में बच्चे अभ्यास कर रहे थे। इसी दौरान छात्र बच्चों के बीच पहुंच गया। जिससे उसके सीने में तीर लग गया। विकास ने हाथ से तुरंत तीर को निकाल लिया, लेकिन उसका आगे का नुकीला लोहे का टुकड़ा सीने में ही फंसा रह गया। स्कूल स्टाफ ने तुरंत घायल छात्र को सागवाड़ा सरकारी अस्पताल पहुंचाया। जहां से छात्र को उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने 4 घंटे तक ऑपरेशन कर युवक के सीने में फंसा तीर का टुकड़ा निकाला। तीर छाती की हड्डी के आर-पार हो गया था। मामला सागवाड़ा स्थित पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय का मंगलवार शाम का है। तीरंदाजी की राष्ट्रीय प्रतियोगिता की चल रही थी तैयार
जवाहर नवोदय स्कूल के प्रिंसिपल अमिल मीणा ने बताया- छात्र विकास तीन साल से यहां पढ़ाई कर रहा है।अगले महीने से तीरंदाजी की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं होनी हैं, जिसके लिए छात्र तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान विकास बीच में आ गया और उसे तीर लग गया। ज्यादा खून बहने से उसे खून चढ़ाने की जरूरत पड़ी। स्कूल के 3 टीचर्स ने ब्लड डोनेट किया। ऑपरेशन के बाद छात्र की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है और वह होश में है। परिजन भी उदयपुर पहुंच गए हैं। डॉक्टर बोले- दिल से लगातार खून बह रहा था ऑपरेशन करने वाले एमबी हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जन डॉ. विनय नैथानी ने बताया कि विकास को लगा तीर छाती की हड्डी के आर-पार हो गया था। तीर का सिरा स्टर्नम और पेरिकार्डियम को पार करके दाहिने वेंट्रिकल में फंस गया था। इस चोट के कारण दिल से लगातार खून बह रहा था और उसके चारों ओर खून जमा हो गया था। जिससे ‘कार्डियक टैम्पोनैड’ की स्थिति बन गई थी। यह एक जानलेवा स्थिति है, जिसमें दिल के चारों ओर दबाव बढ़ने से दिल की खून पंप करने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है। आधी रात में ही डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन
डॉ. विनय नैथानी ने बताया- चोट की गंभीरता को देखते हुए रात आधी रात सीटी स्कैन कराया गया। एवं उसे इमरजेंसी सर्जरी के लिए सीधे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। दाहिनी तरफ के थोराकोटॉमी की गई और पेरिकार्डियम को खोलकर कार्डियक टैम्पोनैड से राहत दिलाई गई। सर्जरी के दौरान जांच से पुष्टि हुई कि तीर स्टर्नम, पेरिकार्डियम और दाहिने वेंट्रिकल के आर-पार हो गया था। तीर के सिरे को सावधानीपूर्वक निकाला गया और दाहिने वेंट्रिकल में लगी चोट से हो रहे रक्तस्राव को सफलतापूर्वक ठीक किया गया। सर्जरी में मरीज को चार यूनिट खून भी चढ़ाया गया।
