विदेश में नौकरी दिलाने और वर्क परमिट दिलाने के नाम पर बीकानेर के एक युवक से 5 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित उमाशंकर पुरोहित (39) ने पंजाब के जीरकपुर पुलिस थाने में ‘ग्रोथ ओवरसीज इंटरनेशनल एज्यूटेक’ कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित का आरोप है कि कंपनी ने उन्हें फर्जी दस्तावेज थमा दिए और जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो उनका नंबर ब्लॉक कर दिया।
60 दिनों में विदेश भेजने का दिया था झांसा
पीड़ित उमाशंकर के अनुसार, वे विदेश में नौकरी की तलाश के दौरान इस कंपनी के संपर्क में आए थे। कंपनी से जुड़ी काव्या शर्मा ने उन्हें आश्वासन दिया था कि लगभग 60 दिनों के भीतर उन्हें वर्क परमिट दिलाकर विदेश भेज दिया जाएगा। इसके एवज में उनसे प्रोसेसिंग और फाइल चार्ज के नाम पर 85 हजार रुपये ऑनलाइन और 4.15 लाख रुपये नकद कुल 5 लाख रुपये लिए गए। जयपुर में मेडिकल कराया, फिर 20 बार चक्कर लगवाए
उमाशंकर ने बताया कि 9 मार्च 2026 को जयपुर के एक डायग्नोस्टिक सेंटर में उनका मेडिकल कराया गया था। इसके बाद उन्हें विदेश भेजने का झांसा देकर करीब 20 बार चंडीगढ़ और जीरकपुर बुलाया गया। आरोप है कि हर बार उन्हें नई तारीख देकर टरका दिया जाता था। इन यात्राओं में उनके करीब 15 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हो गए। 2 लाख की नौकरी छोड़ी, 10 लाख का हुआ नुकसान
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि कंपनी के पक्के भरोसे के बाद उन्होंने अपनी 2 लाख रुपये मासिक आय वाली नौकरी छोड़ दी थी। नौकरी छोड़ने के कारण पिछले 5 महीनों में उन्हें करीब 10 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने पुलिस को सौंपे कथित वर्क परमिट, ई-मेल और अन्य दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए संबंधित विदेशी दूतावास या संस्था से इनकी जांच कराने की मांग की है। पैसे मांगे तो नंबर किया ब्लॉक, पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग
उमाशंकर का आरोप है कि जब काफी समय बीतने के बाद उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो कंपनी के लोगों ने उनका फोन नंबर ब्लॉक कर दिया। उन्होंने पुलिस से इस मामले की निष्पक्ष जांच करने और सबूत के तौर पर व्हाट्सएप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग और बैंक ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड को जांच में शामिल करने का अनुरोध किया है। कंपनी का पक्ष: आरोप बेबुनियाद, शिकायतकर्ता कर रहा परेशान
दूसरी ओर, ‘ग्रोथ ओवरसीज इंटरनेशनल एज्यूटेक’ से जुड़े लोगों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उमाशंकर द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और वह कंपनी को परेशान कर रहे हैं। कंपनी के प्रतिनिधियों का दावा है कि उन्होंने उमाशंकर से केवल 30 से 35 हजार रुपये लिए थे, जिसे वे वापस करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने 5 लाख रुपये लेने के आरोप को पूरी तरह गलत बताया है।
