अरावली पर्वतमाला के पहाड़ों की 100 मीटर की नई परिभाषा तय होने के बाद सुप्रीम कोर्ट (SC) द्वारा गठित हाई लेवल कमेटी शुक्रवार को अलवर के सर्किट हाउस पहुंची। कमेटी ने अरावली संरक्षण और खनन को लेकर आमजन के विचार सुने। जनसुनवाई के दौरान माहौल उस वक्त बदल गया, जब सरिस्का क्षेत्र के ग्रामीण और कुछ खनन व्यवसायी आपस में उलझ गए। मामला इतना बढ़ा कि डीएसपी सहित पुलिसकर्मियों को बीच में आकर खड़ा होना पड़ा। कार्यक्रम के खत्म होने के बाद भी बानसूर से आए राकेश दायम से कुछ लोग उलझ गए। लेकिन पुलिस ने मामला तुरंत शांत करा दिया। ग्रामीणों का सीधे तौर पर आरोप था कि अरावली की परिभाषा में बदलाव केवल खनन माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। वहीं खनन से जुड़े कुछ लोगों सहित अलवर शहर के दो-तीन व्यक्तियों ने कहा कि देश की तरक्की के लिए क्रिटिकल मिनरल जरूरी है। अवैध खनन को रोकना चाहिए। वैध खनन को बढ़ावा देने से पर्यावरण पर अधिक फर्क नहीं पड़ेगा। अभी केवल 1 प्रतिशत अरावली के क्षेत्र में खनन हो रहा है। जनसुनवाई में उठीं प्रमुख आवाजें कैलाश मीणा ने खनन लॉबी पर निशाना साधते हुए कहा— “माफिया कमाने के लिए लड़ रहे हैं और स्थानीय लोग अपने अस्तित्व के लिए। नियमों को ठेंगा दिखाकर खनन हो रहा है, लेपर्ड मारे जा रहे हैं और अवैध-वैध खनन में सैकड़ों जानें जा चुकी हैं। हमारे बचाए जंगलों की बदौलत ही दिल्ली के लोग शुद्ध हवा में सांस ले पा रहे हैं।” “कोरोना भूल गए क्या?” पर्यावरण प्रेमी लोकेश खंडेलवाल ने कहा— “अरावली अमीर-गरीब में भेद नहीं करती। लोग कोरोना के ऑक्सीजन संकट को भूल गए हैं, जो अरावली को खत्म करने की कल्पना कर रहे हैं। हम सादे घरों में रह लेंगे, लेकिन अरावली को तबाह होते नहीं देख सकते।” “अरावली का पत्थर जीवन के लिए जरूरी नहीं” अलवर शहर व्यक्ति राजेंद्र कुमार ने कहा कि पर्यावरण के पक्ष में रुख रखते हुए कहा— “अरावली से ऐसा कोई मिनरल नहीं निकलता जिसके बिना जीवन न चल सके। असली कीमती चीज यहां का पर्यावरण और वन्यजीव हैं। केवल खनन ही विकास का जरिया नहीं है, हम पर्यटन विकसित कर सकते हैं।” छात्राओं ने सुनाई गांवों की ग्राउंड रियलिटी बहरोड़ (पवाना गांव): छात्रा ने बताया कि कस्तूरबा गांधी स्कूल के ठीक बगल में ब्लास्टिंग की जा रही है। गांव में न पीने का साफ पानी बचा है और न ही पशुओं के लिए चारा। कोटपूतली (जोधपुरा गांव): दूसरी छात्रा ने बताया कि सीमेंट फैक्ट्री के कारण प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि बीते 4 वर्षों में 45 लोगों की जान जा चुकी है। एक स्थानीय युवक ने चेतावनी देते हुए कहा, “अरावली के जंगलों को छेड़ा तो वन्यजीव गलियों और मोहल्लों में घूमते नजर आएंगे।” कमेटी का रुख: 31 अगस्त तक कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट कमेटी सदस्य कंचन देवी ने बताया कि आमजन और सभी पक्षों के विचार सुने गए हैं। अब कमेटी अजमेर और उदयपुर में भी बैठकें करेगी और प्रभावित गांवों का दौरा करेगी। CTH से जुड़े मामले फिलहाल अदालत में विचाराधीन हैं, इसलिए निष्कर्ष सीधे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ही रखा जाएगा। कमेटी के अन्य सदस्यों ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट तैयार करने में मल्टी-डिसिप्लिनरी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। कमेटी को 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करनी है। इसमें कुछ बदलाव भी हो सकता है।
