टाइप-1 डायबिटीज (T1D) की देखभाल के लिए राजस्थान में विकसित जमीनी मॉडल का अध्ययन करने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और देश के विभिन्न राज्यों से स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता, मरीज हितैषी और विचारकों का अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को नागौर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने जिला चिकित्सालय का दौरा कर टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। यह दौरा 30 जुलाई से 1 अगस्त तक जोधपुर में आयोजित इंटरनेशनल टाइप-1 डायबिटीज समिट-2026 के तहत किया गया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़ की संस्थापक और ब्रेकथ्रू T1D की ग्लोबल एम्बेसडर पद्मजा कुमारी परमार ने किया। बच्चों और परिजनों से किया संवाद दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों से बातचीत की। प्रतिनिधियों ने यह भी देखा कि सामुदायिक संगठनों के सहयोग से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को किस तरह निःशुल्क इंसुलिन, नियमित ब्लड शुगर जांच और बीमारी के बेहतर प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान सरकार की मिशन मधुहारी योजना के तहत चल रहे कार्यों का भी जायजा लिया। नागौर से शुरू हुई पहल, अब पूरे राजस्थान में विस्तार मिशन मधुहारी की शुरुआत नवंबर 2024 में नागौर जिला चिकित्सालय से की गई थी। अब यह पहल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच चुकी है। राजस्थान सरकार की आर्थिक समीक्षा के अनुसार दिसंबर 2025 तक 1,700 से अधिक मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका था। इन मरीजों को निशुल्क इंसुलिन, ग्लूकोमीटर और ग्लूकोज जांच स्ट्रिप्स उपलब्ध कराई जा रही हैं। ‘सिर्फ इंसुलिन देना पर्याप्त नहीं’ द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़ की संस्थापक पद्मजा कुमारी परमार ने कहा कि टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों के लिए केवल इंसुलिन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। मरीज और उनके परिवारों को इंसुलिन के सुरक्षित उपयोग, ब्लड शुगर की निगरानी, बीमारी के लक्षणों की पहचान, संतुलित आहार और नियमित जीवनशैली के बारे में प्रशिक्षित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि “इंसुलिन जीवन बचाती है, लेकिन इसके साथ शिक्षा, आत्मविश्वास और निरंतर सहयोग भी उतना ही जरूरी है।” नागौर में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, चिकित्सा विशेषज्ञ और सामुदायिक संगठन मिलकर बच्चों और उनके परिवारों के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। राजस्थान समेत 3 राज्यों के HOPE कार्यक्रम की जानकारी साझा की इमपेशेंट नेटवर्क की प्रतिनिधि नूपुर लालवानी और ज्योत्सना रंगीन ने राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में संचालित हेल्पिंग अदर्स विद पीयर एन्करेजमेंट (HOPE) कार्यक्रम के अनुभव भी साझा किए। प्रतिनिधिमंडल ने नागौर मॉडल को जिला और समुदाय स्तर पर डायबिटीज केयर से जुड़े वैश्विक प्रयासों को प्रभावी तरीके से लागू करने का उदाहरण बताया। नीति से लेकर मरीजों की देखभाल तक मंथन इंटरनेशनल टाइप-1 डायबिटीज समिट-2026 का आयोजन द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़, ब्रेकथ्रू T1D और विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और मरीज हितैषियों द्वारा टाइप-1 डायबिटीज की शुरुआती पहचान, इंसुलिन तक समान पहुंच, डायबिटीज तकनीक, मानसिक स्वास्थ्य, सार्वजनिक नीति और मरीज-केंद्रित देखभाल जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। नागौर का दौरा इसी प्रयास का हिस्सा रहा, जिसमें जिला स्तर पर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और सामुदायिक सहयोग के जरिए टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और परिवारों तक बेहतर एवं निरंतर देखभाल पहुंचाने के मॉडल को समझा गया।