अबोहर शहर के रामनगर इलाके में मंगलवार सुबह एक गरीब परिवार के कमरे और बरामदे की छतें अचानक भरभरा कर गिर गईं। गनीमत यह रही कि बरामदे में बैठकर पढ़ाई कर रही अपनी बेटी को मां ने समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान टल गया। इस हादसे में परिवार का सारा घरेलू सामान और खाने-पीने का राशन मलबे में दब गया है, जिसके चलते यह गरीब परिवार अब खुले आसमान के नीचे जीवन गुजारने को मजबूर हो गया है। रामनगर गली नंबर 2 निवासी नरेश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि सुबह उनकी पत्नी घर के आंगन में पशुओं की देखभाल कर रही थीं, जबकि उनकी बेटी बरामदे में बैठकर अपनी पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान उनकी पत्नी को छत से रेत और बजरी गिरने की आवाज सुनाई दी। खतरे को भांपते हुए उन्होंने तुरंत दौड़कर अपनी बेटी का हाथ पकड़ा और उसे खींचकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनके बाहर आते ही कमरे और बरामदे की भारी-भरकम छत अचानक नीचे आ गिरी और सारा सामान मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। परिजनों का कहना है कि यदि सतर्कता न बरती जाती तो बेटी की जान भी जा सकती थी।
पीड़ित परिवार ने बताया कि क्षेत्र में हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण उनके मकान की छतें पहले ही काफी कमजोर और जर्जर हो चुकी थीं। आज सुबह अचानक तेज धूप निकलने के कारण जर्जर छत में बड़ी दरारें आ गईं और देखते ही देखते वह ढह गई। इस घटना के बाद अब उनके पास रहने के लिए केवल एक ही कमरा बचा है, वह भी बेहद जर्जर हालत में है और रहने के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। हादसे के कारण परिवार की चारपाइयां, बक्से, साइकिल, गैस चूल्हा, बर्तन, कपड़े और घर का सारा राशन मलबे के नीचे दब गया है। सामान नष्ट होने के कारण अब स्थिति यह है कि परिवार के सामने एक वक्त का भोजन तैयार करने का भी संकट खड़ा हो गया है। इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार ने स्थानीय प्रशासन और समाज सेवी संस्थाओं से तुरंत आर्थिक सहायता तथा पुनर्वास की गुहार लगाई है।
