किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब ने राज्य सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के विरोध में बटाला में जोरदार प्रदर्शन किया। संत बाबा लाल सिंह कुल्ली वाले जी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान गुस्साए किसान-मजदूरों ने पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री का पुतला जलाकर अपना रोष प्रकट किया। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई जोन अध्यक्ष निशान सिंह, जिला प्रेस सचिव गुरप्रीत नानोवाल, जोन सचिव कैप्टन शमिंदर सिंह और बीबी हरजीत कौर ने संयुक्त रूप से की।किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब ने एक बार फिर दोहराया कि अगर सभी पीड़ित वर्गों की मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। बरनाला लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा, तानाशाही का लगाया आरोप प्रदर्शन को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने बरनाला में अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों और महिलाओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले आम लोगों और मजदूरों पर अत्याचार करना सरकार की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। नेताओं ने कहा कि लाठी के जोर पर जन-आंदोलनों को दबाया नहीं जा सकता। बिजली कर्मचारियों की मांगों को नजरअंदाज करने पर चेतावनी किसान-मजदूर नेताओं ने पंजाब सरकार पर बिजली कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित पड़ी जायज मांगों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बिजली कर्मचारियों, मजदूरों और अन्य श्रमिक वर्गों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया, तो आने वाले दिनों में इस संघर्ष को और अधिक तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और प्रशासन की होगी। जंतर-मंतर पर छात्रों की जीत का किया स्वागत प्रदर्शन के दौरान कमेटी के पदाधिकारियों ने जंतर-मंतर (नई दिल्ली) में अपने अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष कर रहे छात्रों की मांगें स्वीकार किए जाने पर उन्हें बधाई दी। नेताओं ने इसे जन-संघर्ष की एक बड़ी और ऐतिहासिक जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सफलता साबित करती है कि अपने हक केवल संगठित होकर और निरंतर संघर्ष के जरिए ही हासिल किए जा सकते हैं। इस मौके पर गुरदीप कौर, बलविंदर कौर, जसबीर सिंह, काबल सिंह, लखविंदर सिंह, त्रिलोचन सिंह, अवतार सिंह, बलविंदर सिंह, गुरमेज सिंह, उत्तम सिंह, रघुवीर सिंह, सलविंदर सिंह, हरभजन सिंह और जोगिंदर सिंह सहित भारी संख्या में किसान व मजदूर मौजूद रहे।