हाड़ौती संभाग में इस साल पिछले साल की तुलना में मानसून की रफ्तार काफी धीमी है। हालात ये हैं कि अभी भी चंबल के 4 बड़े बांध 32% खाली हैं। इन चारों बांधों- गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज की कुल क्षमता 10248.97 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCUM) है। 24 जुलाई सुबह 8 बजे तक चारों बांधों में 6926.403 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी भरा है। मध्यप्रदेश और चंबल नदी के कैचमेंट एरिया में बारिश कम होने से बांधों में पानी की आवक नहीं हो रही है, जिससे रबी सीजन की फसलों को लेकर चिंता बढ़ गई है। इन बांधों में 67.58% पानी है। 32.42 % खाली हैं। इन्ही बांधों का पानी दाईं व बाईं मुख्य नहर में छोड़ा जाता है। रबी के सीजन में मध्यप्रदेश और राजस्थान की 4.58 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होती है। पिछले साल अच्छी बारिश होने से कोटा बैराज की केपेसिटी का 7 गुना पानी चंबल नदी में छोड़ा जाता है जो व्यर्थ ही चला जाता है। रबी फसलों की चिंता सताने लगी हर साल अक्टूबर से रबी के सीजन में नहरों में पानी छोड़ा जाता है। विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार हर साल रबी की फसलों के लिए सीजन में 150 से 160 दिन नहरें चलती हैं। राजस्थान व मध्यप्रदेश के 4.58 लाख हेक्टेयर की सिंचाई के लिए औसत 2000 से 2600 (MCUM) पानी की जरूरत पड़ती है। बारिश नहीं होने व बांधों की स्थिति को देखते हुए किसानों को अभी से ही रबी के सीजन में सिंचाई की चिंता सताने लगी है। गांधी सागर बांध में नहीं आया पानी किसान नेता गिर्राज शर्मा ने बताया कि चंबल नदी पर सबसे बड़ा बांध गांधी सागर है। गांधी सागर का पानी एमपी व राजस्थान में सिंचाई के काम आता है। अभी तक अच्छी बारिश नहीं हुई। इस कारण बांध में पानी नहीं आया है। अभी तो गांधी सागर में पानी का लेवल ठीक दिख रहा है। हो सकता है एक दो साल सिचाई में दिक्कत नहीं हो, लेकिन बारिश नहीं हुई तो आगे परेशानी बढ़ सकती है। अक्टूबर में रबी का सीजन आ आएगा। गेंहू व लहसुन में पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है। हर साल बारिश के दिनों में लाखों क्यूसेक पानी चंबल नदी की डाउन स्ट्रिम में व्यर्थ ही छोड़ा जाता है। उसका उपयोग नहीं हो पाता। क्षेत्र के किसानों की मांग है, बारिश के दिनों में बैराज से व्यर्थ छोड़े जाने वाले पानी का सदुपयोग हो। सरकार ऐसी पॉलिसी बनाए कि बारिश-कम ज्यादा होने पर भी बांधों की भराव क्षमता हमेशा बनी रहे। बांधों में पानी की कमी नहीं आए। बांधों में पानी की कमी नहीं होगी तो किसानों को भी नहरों में पानी छुड़वाने के लिए बार बार आंदोलन नहीं करना पड़ेगा। रबी सीजन नहरों में पानी छोड़ा RMC का कुल 3.56 लाख हेक्टेयर कमांड एरिया बाईं मुख्य नहर के सेक्शन इंजीनियर (SE) हरेत लाल मीणा ने बताया कि चंबल कमांड क्षेत्र से दो नहरें (LMC व RMC) निकलती हैं। बाईं मुख्य नहर (LMC) का कोटा व बूंदी जिले के लबान खटखड़ तक 1113 किमी फैलाव है। इसकी क्षमता 1500 क्यूसेक की है। इस नहर से 1 लाख 2 हजार हेक्टेयर कमांड एरिया जुड़ा है। दाईं मुख्य नहर (RMC) का राजस्थान (कोटा-बारां जिला) में 1376 किमी फैलाव है। आगे ये नहर चंबल नदी के किनारे मध्यप्रदेश के जिले भिंड, मुरैना, ग्वालियर और श्योपुर तक जाती है। इसकी क्षमता 6000 क्यूसेक की है। इस नहर से राजस्थान में 1 लाख 27 हजार व एमपी में 2 लाख 29 हजार यानी कुल 3.56 लाख हेक्टेयर कमांड एरिया जुड़ा है। खरीफ में नहरों में पानी छोड़ा इस सीजन में अभी तक बारिश कम हुई है। किसानों ने धान फसल की है। LMC व RMC कमांड क्षेत्र में 90 हजार हेक्टेयर में धान की बुआई हुई है। बारिश नहीं होने से किसानों ने खरीफ की फसल के लिए नहरों में पानी छोड़ने की डिमांड की थी। वर्तमान में डेम के स्टोरेज से पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। रबी के सीजन में भी डेम से नहरों में पानी छोड़ा जाता है। किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। बांधों की स्थिति मध्य प्रदेश के मंदसौर तहसील में बना गांधी सागर चंबल नदी का बड़ा बांध है। इस बांध की क्षमता 7164.94 MCUM है। 24 जुलाई सुबह 8 बजे तक गांधी सागर 4835.668 MCUM भरा है। राणा प्रताप सागर चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा तहसील में बना है। इस बांध की क्षमता 2904.85 MCUM है। 24 जुलाई सुबह 8 बजे तक राणा प्रताप सागर 1933.922 MCUM भरा है। जवाहर सागर बांध बूंदी जिले के तालेड़ा तहसील में बना है। इस बांध की क्षमता 67.12 MCUM है। 24 जुलाई सुबह 8 बजे तक जवाहर सागर 46. 723 MCUM भरा है। कोटा बैराज की क्षमता 112.06 MCUM है। 24 जुलाई सुबह 8 बजे तक कोटा बैराज 110.09 MCUM भरा है। सहायक अभियंता व प्रभारी अधिकारी बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ कोटा बैराज नितेश कुमार वर्मा ने बताया कोटा बैराज की क्षमता 112.06 मिलियन क्यूबिक मीटर है। पिछले साल मानसून में कैचमेंट एरिया व कमांड एरिया में अच्छी बारिश हुई थी। साल 2025 में 20 जुलाई तक कोटा बैराज से 859.90 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी को चंबल नदी में व्यर्थ ही छोड़ा गया। यानी कोटा बैराज की क्षमता से 7.67 गुना पानी चंबल में छोड़ा गया। पिछले साल एक महीने खुले रहे कोटा बैराज के गेट साल 2025 में एमपी व चंबल के कमांड एरिया में झमाझम बरसात हुई। जिसके चलते चंबल के बांध लबालब हो गए। स्थिति ऐसी हो गई कि 18 जून से 20 जुलाई के बीच 30 से ज्यादा दिनों तक कोटा बैराज के गेट खोलने पड़े। 14 जुलाई को तो कोटा बैराज के 11 गेट 15-15 व 1 गेट 10 फीट खोला गया और 2 लाख 2 हजार 692 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज करना पड़ा। कोटा बैराज से चंबल नदी में छोड़ा गया पानी सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर होता हुआ यमुना नदी में जाता है।
