अलवर में जगन्नाथ मेले में पिछले 20-25 सालों से झूला लगाने वाले संचालकों को नगर निगम ने मेला परिसर से हटा दिया। निगम ने संचालकों को मेला परिसर से करीब 3 किलोमीटर दूर भेज दिया। अलवर नगर निगम ने मेले में झूला लगाने के लिए इस बार नई कंपनी को ठेका दिया है। इसे लेकर संचालकों ने नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि इस बार मेले का ठेका हरियाणा की एक कंपनी को दे दिया गया, जिसके बाद वर्षों से मेले में झूले लगाने वाले स्थानीय संचालकों को मेला परिसर से हटा दिया गया। उनका कहना है कि इससे कई परिवारों का रोजगार प्रभावित हुआ है। संचालकों ने यह भी आरोप लगाया कि निगम ने उन्हें चेतावनी दी है कि यदि मेला स्थल के 3 किलोमीटर दायरे में भी झूले लगाए तो उनके चालान काटे जाएंगे। झूला लगाने वाले संचालकों की बात निगम अधिकारियों ने नहीं सुनी सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र क्रांतिकारी ने कहा कि ये लोग करीब दो दशक से मेले में झूले लगाते आ रहे हैं, लेकिन इस बार ठेका दूसरी कंपनी को मिलने के बाद इन्हें जगह नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब संचालक निगम पहुंचे तो अधिकारियों ने उनकी बात तक नहीं सुनी। तीन किलोमीटर के दायरे में झूले लगाने पर होगी कार्रवाई झूला संचालक योगेश कुमार ने बताया कि वह हर साल छोटे झूले लेकर आते हैं और पहले उनके पिता भी इसी मेले में झूले लगाते थे। बड़े झूलों के लिए वे निर्धारित शुल्क देने को तैयार थे, लेकिन इस बार अंदर जगह नहीं होने की बात कहकर मना कर दिया गया। उनका कहना है कि पहले मेले के बाहर छोटे झूले लगाने पर किसी अनुमति या रसीद की जरूरत नहीं पड़ती थी, लेकिन इस बार तीन किलोमीटर के दायरे में भी झूले लगाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने मांग की कि उन्हें मेले के बाहर झूले लगाने की अनुमति दी जाए। योगेश ने बताया कि भरतपुर, डीग, जयपुर, भुसावर सहित उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भी कई झूला संचालक हर साल अलवर आते हैं। मेला परिसर का पहले ही हो चुका टेंडर नगर निगम के आरओ एवं मेला प्रभारी भूवन शुक्ला ने बताया कि मेला परिसर का टेंडर पहले ही हो चुका है और दुकानों का आवंटन भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि मेले के बाहर झूला संचालकों से रसीद काटने या उन्हें हटाने की जानकारी फिलहाल उनके पास नहीं है। मामले की जानकारी लेने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
