कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल का कहना है- कांग्रेस सार्वजनिक रूप से यह कह दे कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार सरकार आरक्षण दिए बिना ही चुनाव कराए, तो हम उस पर तुरंत विचार कर सकते हैं। लेकिन ऐसा कांग्रेस कभी नहीं कहेगी कि बिना ओबीसी वर्ग को आरक्षण दिए चुनाव करवाए जाएं। उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग का गठन करना सरकार का काम था, और उसकी रिपोर्ट देना ओबीसी आयोग का काम है। सरकार के स्तर पर चुनाव से संबंधित जो कार्रवाई होनी चाहिए, वह पूरी हो चुकी है। जब भी चुनाव आयोग कहेगा, सरकार तैयार है। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र निकाय है। मंत्री ने हाईकोर्ट की ओर से की गई टिप्पणी के सवाल को टालते हुए कहा कि यह मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए इस पर मेरी टिप्पणी करना ठीक नहीं है। इसकी एक मर्यादा है। दरअसल, कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल शनिवार को बाड़मेर दौरे पर रहे। उन्होंने चौहटन स्थित विरात्रा माता मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद बाड़मेर सर्किट हाउस पहुंचे, जहां अफसरों की मीटिंग के बाद मीडिया से भी बातचीत की। जब तक जांच नहीं, तब तक राजनीतिक आरक्षण नहीं दे सकते
मंत्री ने कहा कि साल 2021 में महाराष्ट्र के एक केस में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय लिया था कि अगर राजनीतिक क्षेत्र में ओबीसी वर्ग को आरक्षण देना है, तो राज्य सरकारें त्रि-स्तरीय जांच करवाने के बाद ही ऐसा कर सकती हैं। कोर्ट ने दोहराया था कि जब तक त्रि-स्तरीय जांच नहीं करवाते, तब तक आप राजनीतिक आरक्षण नहीं दे सकते। उस समय की तत्कालीन सरकार ने 2021, 2022 और 2023 में ओबीसी आयोग का गठन नहीं किया। ऐसे में अब फैसला कांग्रेस को करना है कि वे क्या चाहते हैं। तबादलों में रुपयों का लेन-देन कांग्रेस सरकार में हुआ
मंत्री ने कहा कि तबादलों में रुपए लेने के कांग्रेस के आरोप का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के राज में जयपुर में एक कार्यक्रम में बड़े-बड़े शिक्षाविद मौजूद थे। तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा भी वहां थे। तब अशोक गहलोत ने शिक्षाविदों से पूछा था कि क्या ट्रांसफर में पैसे लिए जाते हैं? तब सबने एक राय होकर वहां पर कहा था कि हां, पैसे लिए जाते हैं। यह तो प्रमाणित तथ्य हो गया। अभी कांग्रेस जो आरोप लगा रही है, वह पूर्ण रूप से निराधार है। प्रसूताओं की मौत मामले में अब लीकेज नहीं होगा
प्रसूताओं की मौत के सवाल पर मंत्री ने कहा कि मौतें कितनी हुईं और कैसे हुईं, इसमें तथ्यात्मक भिन्नता रहती है। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए, हम यह बात स्वीकार करते हैं। हॉस्पिटल में कोई भी आएगा तो वह इलाज के लिए आएगा। इसके अलग-अलग तरह के स्पष्टीकरण हैं, लेकिन मैं इसको इस रूप में लेता हूं और हम स्वीकार करते हैं कि हमारे हॉस्पिटल में जितने भी रोगी आएं, उनका प्रभावी इलाज होना चाहिए। जहां कहीं भी कमियां (लीकेज) रही हैं, वे अब नहीं होंगी, ऐसा हम आपको विश्वास दिलाते हैं। कांग्रेस ने जानबूझकर बॉर्डर पर भवनों का निर्माण होने दिया
बॉर्डर इलाकों में ‘ऑपरेशन क्लीन’ के सवाल पर भी मंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बहुत समय पहले देश की सुरक्षा को लेकर यह तय किया गया था कि बॉर्डर एरिया में कोई भी अवांछनीय गतिविधि या संदिग्ध एक्टिविटी न हो, जिससे बाहरी और आंतरिक सुरक्षा खतरे में न पड़े। इसलिए 50 किलोमीटर का एरिया प्रतिबंधित किया गया है, जिससे वहां पर कोई अवैध निर्माण न हो। लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तुष्टीकरण के तहत जानबूझकर ऐसे भवनों का निर्माण होने दिया, जो नहीं होना चाहिए था। इसको लेकर केंद्र सरकार को इनपुट मिला कि वहां पर संदिग्ध गतिविधियां हैं और देश की सुरक्षा को लेकर खतरा है। गृहमंत्री अमित शाह ने मीटिंग कर इसकी पुष्टि की और यह माना गया कि यहां एक्टिविटी ठीक नहीं है। तब हमने निर्णय लिया कि ऐसे भवनों के निर्माण पर कार्रवाई की जाए जो संदिग्ध एक्टिविटी या प्रतिबंधित क्षेत्र में आते हैं, और सरकार की ओर से कार्रवाई की गई। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार को यह अधिकार है, क्योंकि देश की सुरक्षा पहले है और बाकी सब बाद में। कोर्ट ने रिट याचिका को खारिज कर दिया। इनकी ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब कोर्ट ने दे दिया है।