चित्तौड़गढ़ में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की साल 2022 की हिंदी लेक्चरर (स्कूल शिक्षा) भर्ती परीक्षा में फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल करने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और गिरफ्तारी की है। SOG ने जोधपुर निवासी अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया को 14 जुलाई को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि उसने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार के नाम पर फर्जी एमए (हिंदी) की डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई थी। इस मामले में अब तक फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करने वाली अभ्यर्थी समेत 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी पाने की कोशिश SOG के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया- RPSC में हिंदी लेक्चरर भर्ती के दौरान अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी, गंगरार से जारी एमए (हिंदी) की डिग्री जमा कराई थी। आयोग ने जब डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन कराया तो पता चला कि यह डिग्री मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने जारी ही नहीं की थी। इसके बाद मार्च 2024 में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि अभ्यर्थी ने फर्जी डिग्री और झूठे शपथ पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश की थी। ऐसे जुड़ा अशोक चोटिया का नाम जांच आगे बढ़ी तो एसओजी को पता चला कि अशोक विश्नोई उर्फ अशोक चोटिया ने इस पूरी प्रक्रिया में बिचौलिए की भूमिका निभाई। उसने महेंद्र सिंह राव के जरिए डॉ. सुरेश कुमार से संपर्क किया और उनकी बहन ब्रह्मा कुमारी के लिए फर्जी डिग्री और मार्कशीट की व्यवस्था करवाई। जांच में यह भी सामने आया कि अशोक ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन डीन कौशल किशोर चंदुल से संपर्क कर यह फर्जी डॉक्यूमेंट्स उपलब्ध कराए। SOG का कहना है कि जांच में अशोक की भूमिका के पर्याप्त सबूत मिले हैं, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। अदालत से 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड मिलने के बाद उससे पूछताछ की जा रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। 15 गिरफ्तार, दूसरे मामलों में भी आरोपी एसओजी के अनुसार इस मामले में अब तक फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करने वाली अभ्यर्थी सहित कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अशोक विश्नोई के खिलाफ इसी तरह फर्जी डिग्री दिलाने से जुड़ा एक और मामला भी अजमेर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज है, जिसमें उसकी गिरफ्तारी अभी बाकी है। इसके अलावा वह जोधपुर जिले के कुड़ी भगतासनी थाने में दर्ज एक अन्य मामले में भी पहले गिरफ्तार हो चुका है। एसओजी का कहना है कि पूछताछ के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट के जरिए और कितने लोगों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराई गईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
