प्रदेश में अच्छी बारिश के लिए बांसवाड़ा में मेंढक-मेंढ़की की शादी करवाई गई। मेंढक को दूल्हे की तरह कपडे पहनाए गए। वहीं मेंढ़की को लहंगा पहनाया गया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाजार में बारात निकाली गई। इससे पहले शहर के लोगों को शादी के कार्ड भी बांटे गए और विवाह में शामिल होने का न्योता दिया गया। वैदिक परंपरा की तरह हल्दी और मेहंदी की रस्म भी निभाई गई। प्रदेश में अच्छी बारिश की कामना की बांसवाड़ा के क्रांतिकारी तरुण मंच और डेगली माता चौक क्षेत्र के लोगों ने ये शादी करवाई। आयोजन से जुड़े क्रांतिकारी तरुण मंच के पदाधिकारी अशोक मधहोश ने बताया- राजस्थान में बरसात नहीं आ रही है, जिससे किसान चिंतित हैं और हर समाज का हर वर्ग परेशान है। खेतों में फसलें सूख रही हैं और पानी पीने की भी समस्या आ रही है। किसान ने महंगा बीज बोया है, लेकिन पानी नहीं आ रहा। इतनी भीषण गर्मी पड़ रही है कि पानी की बहुत आवश्यकता है। ऐसे में सालों पुरानी मेंढक मेंढकी के विवाह की परंपरा को आयोजित किया गया। तस्वीरों में देखें बारात… अच्छी बारिश की मान्यता; शादी के कार्ड भी बांटे मधहोश ने बताया- डेगली माता चौक पर मेंढक-मेंढकी का शुभ विवाह पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न किया। मान्यता है कि ऐसा करने से बरसात अच्छी होती है। इस साल भी हमारी यही भावना है कि अच्छी बरसात हो और सबका मंगल ही मंगल हो। शादी से पहले बाकायदा पूरे शहर में निमंत्रण पत्रिकाएं बांटी गईं थी। लोगों को इस मांगलिक समारोह में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया था। दूल्हा-दुल्हन जैसे तैयार किया मधहोश ने बताया- विवाह की रस्में पूरी श्रद्धा और वैदिक रीति-रिवाज के साथ डेगली माता चौक पर शुभ मुहूर्त में संपन्न कराई गईं। आम शादियों की तरह ही मेंढक और मेंढकी को दूल्हा-दुल्हन की तरह कपड़े पहनाए गए, उन्हें जेवर पहनाए गए तथा गुलाल और हल्दी-मेहंदी जैसी सभी पारंपरिक रस्में निभाई गईं। समारोह के अंत में उपस्थित लोगों को मिठाई बांटकर शुभकामनाएं दी गईं। इस अनूठे विवाह को देखने के लिए शहरभर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मेंढकी की विदाई भी की ढोल-नगाड़ों की धुन पर बारात निकाली गई। बारात डेगली माता चौक से शुरू होकर गणेश मंदिर और आजाद चौक होते हुए वापस आयोजन स्थल पर पहुंची। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मेंढक-मेंढकी के सात फेरे करवाए गए, जिसके बाद मेंढकी की विदाई की रस्म भी पूरी की गई।
