राजस्थान में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रस्तावित कानून के मसौदे को व्यावहारिक, सर्वसमावेशी और जन-भावनाओं के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार से जयपुर कलेक्ट्रेट सभागार में दो दिवसीय जयपुर संभाग स्तरीय जनसुनवाई शुरू हुई। जनसुनवाई में आमजन, विभिन्न धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से गठित सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता वाली समिति सुझावों के आधार पर यूसीसी का मसौदा तैयार कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। धर्मगुरुओं की राय में दिखा मतभेद जनसुनवाई के दौरान अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरुओं ने अपने-अपने विचार रखे। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला देते हुए धार्मिक रीति-रिवाजों और मान्यताओं से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करने की मांग की। वहीं हिंदू समाज के धर्मगुरुओं ने पूरे देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने का समर्थन किया। लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त कानून की मांग बैठक के दौरान लगभग सभी धर्मगुरुओं ने लिव-इन संबंधों पर चिंता जताई। उनका कहना था कि लिव-इन संबंध सामाजिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं हैं। उन्होंने ऐसे संबंधों में विवाद होने की स्थिति में महिला और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान बनाने, लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण करने तथा सभी पक्षों के अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की। ऑनलाइन भी दिए जा सकेंगे सुझाव समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि दो दिवसीय जनसुनवाई के माध्यम से विभिन्न वर्गों से सुझाव लिए जा रहे हैं। इसके अलावा आमजन ऑनलाइन माध्यम से भी अपने सुझाव भेज सकते हैं। प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। इसके आधार पर समान नागरिक संहिता के मसौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
