जयपुर नगर निगम में कार्यरत श्रमिक (लेबर) को काम के बदले दिए गए वेतन की राशि उसके रिटायरमेंट भुगतान (सेवानिवृत्ति परिलाभों) से काटने के मामले में लेबर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से गुरुवार सुबह 11:30 बजे तक जवाब मांगा है। जयपुर महानगर द्वितीय के श्रम न्यायालय प्रथम के जज दिनेश कुमार गुप्ता ने निगम की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा- नागरिकों के साथ लोकसेवकों का इस तरह का गुलामी जैसा व्यवहार लोकतंत्र को शीर्षासन की मुद्रा में लाने का प्रयास है। ऐसी स्थिति में आमजन में व्यवस्था के प्रति असंतोष उत्पन्न होता है और समाज में अराजकता की स्थिति पैदा होती है।” कोर्ट ने आगे कहा- शासन-प्रशासन में बैठे लोकसेवकों का इस तरह का निंदनीय और असंवेदनशील व्यवहार, नागरिकों को कीड़े-मकोड़े और स्वयं को राजा-महाराजा समझने की मानसिकता को दर्शाता है। घिनौनी घटना को साधारण घटना बताया कोर्ट ने कहा- इस मामले में सुनवाई के दौरान निगम के लेखाधिकारी जयराम चौधरी ने बताया कि श्रमिक रामकरण ने 30 जून 2015 को सेवानिवृत्ति की उम्र प्राप्त कर ली थी। इसके बावजूद उससे 31 मार्च 2016 तक ड्यूटी करवाई गई। वहीं, इसके बदले भुगतान किए गए वेतन-भत्तों की राशि श्रमिक की सेवानिवृत्ति के समय उपार्जित अवकाश (अर्न लीव) के भुगतान में से कटौती करके वसूल की गई। कोर्ट ने कहा- लेखाधिकारी का ऐसा व्यवहार बताता है कि वह मानवीय गरिमा के साथ खिलवाड़ किए जाने की श्रेणी में आने वाली इस असाधारण रूप से घिनौनी घटना को एक साधारण घटना बता रहे हैं। एक सरकारी अधिकारी द्वारा इस वीभत्स घटना को गंभीरता से लेने के बजाय मजाक का विषय समझा जा रहा है। ‘काम के बदले दिए वेतन’ की वसूली समझ से परे कोर्ट ने कहा, “हम काम के बदले दिए गए वेतन की राशि की वसूली किए जाने के पीछे की वजह को समझने में पूरी तरह से असफल हैं। यह और भी तकलीफदायक है कि निगम अपने द्वारा की गई इस कार्रवाई को जायज ठहराने का प्रयास कर रहा है। जबकि होना यह चाहिए था कि जब श्रमिक ने 26 मार्च 2018 को लिखित में प्रार्थना पत्र दिया था, उसी समय उसकी कटौती की गई राशि उसे तुरंत लौटाई जाती और दोषी अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती। 11 साल तक निगम आयुक्त रहे अधिकारियों को नोटिस कोर्ट ने 30 जून 2015 से लेकर अभी तक नगर निगम आयुक्त रहे सभी अधिकारियों को नोटिस जारी करके उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने कहा कि क्यों न इन सभी के खिलाफ श्रमिक से बेगार लेने, धोखाधड़ी करने और उसका उत्पीड़न करने के आपराधिक कृत्यों को लेकर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।