मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को उदयपुर की सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट देवास-III और देवास-IV पेयजल परियोजना का हवाई सर्वे किया। सीएम ने हैलिकॉप्टर से निर्माणाधीन देवास-3 और देवास-4 बांधों के डैम एक्सिस को देखा। इसके साथ ही टनल-3 के तहत 3.15 किलोमीटर, 5.325 किलोमीटर और 9.10 किलोमीटर के एडिट सहित अलग-अलग निर्माण साइट्स का जायजा लिया और काम की रफ्तार को देखा। हवाई सर्वे के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अफसरों से प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति, अब तक हुए निर्माण और आगे की प्लानिंग की पूरी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और काम कर रही एजेंसी को साफ निर्देश दिए कि प्रोजेक्ट के सभी काम तय समय में पूरे होने चाहिए। काम में क्वालिटी और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, ताकि उदयपुर शहर और आसपास के इलाकों को आने वाले समय में पीने के पानी की कोई किल्लत न हो। सीएम शर्मा ने कहा कि देवास-III और देवास-IV प्रोजेक्ट उदयपुर के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। इसके पूरा होने से शहर को लंबे समय तक पीने का साफ और पर्याप्त पानी मिल सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को आपस में तालमेल बिठाकर काम की स्पीड बढ़ाने को कहा। इस दौरान वहां मौजूद बड़े प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बांध और टनल के निर्माण से जुड़ी प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपी। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से उदयपुर की प्यास तो बुझेगी ही, साथ ही पर्यटन को भी बड़ा फायदा होगा। इससे शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली पिछोला, स्वरूप सागर और फतहसागर जैसी झीलों का जलस्तर हमेशा बना रहेगा। झीलों में पानी रहने से यहां का पर्यावरण सुधरेगा और पर्यटन व्यवसाय को नई मजबूती मिलेगी। देवास तृतीय योजना के तहत गोगुंदा तहसील के नाथियाथल गांव के पास 703 एमसीएफटी क्षमता का बांध बन रहा है। यहां से 10.50 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाकर पानी को पहले से बने देवास द्वितीय आकोदडा बांध में पहुंचाया जाएगा। इसके बाद आकोदडा बांध और सुरंग के जरिए यह पानी सीधे उदयपुर की पिछोला झील में आएगा। वहीं, देवास चतुर्थ योजना में गोगुंदा के ही अंबावा गांव के पास 390 एमसीएफटी क्षमता का बांध बनेगा, जिसे 4.15 किलोमीटर लंबी सुरंग से देवास तृतीय बांध से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रोजेक्ट के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस यानी वन भूमि की मंजूरी केंद्र सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय से मिल चुकी है। वहीं, प्राइवेट जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजे का पैसा भी बांटना शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा, प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाले बाकी परिवारों को विशेष अनुग्रह राशि देने का प्रस्ताव भी प्रोसेस में है।
