अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (स्कूल शिक्षा) के आह्वान पर गुरुवार को डीग में 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने प्रदर्शन कर टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट देने की मांग उठाई। शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट के 29 मई 2026 के निर्णय के बाद अपनी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और भविष्य को लेकर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। जिला मुख्यालय तक निकाली रैली शिक्षक सुबह 11 बजे किशन लाल जोशी स्कूल, डीग के बाहर एकत्र हुए। इसके बाद जिलाध्यक्ष अनिल सीही और जिला मंत्री देवेंद्र यादव के संयुक्त नेतृत्व में रैली निकालते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चिंता जिलाध्यक्ष अनिल सीही ने बताया कि राजस्थान सहित देशभर के लाखों शिक्षक वर्तमान में अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया था। सीही ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय के बाद 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। इस निर्णय के कारण ऐसे शिक्षकों को अपनी नौकरी सुरक्षित रखने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य हो सकता है। पहले से नियुक्त शिक्षकों पर नियम लागू करने का विरोध महासंघ का कहना है कि टीईटी अधिसूचना जारी होने से पहले देश के विभिन्न राज्यों में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय के प्रचलित नियमों और निर्धारित योग्यता मानदंडों के आधार पर की जा चुकी थीं। ऐसे में बाद में लागू किए गए पात्रता मानदंडों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायसंगत नहीं है। जिला मंत्री देवेंद्र यादव ने कहा कि यह आंदोलन केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने और शिक्षकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह ज्ञापन सौंपा गया है।
विधिक सिद्धांतों का दिया हवाला देवेंद्र यादव ने कहा कि भारतीय विधिक और प्रशासनिक व्यवस्था का स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नियम, अधिसूचना या नीति सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है। पूर्व में विधिवत संपन्न नियुक्तियों तथा अर्जित सेवा अधिकारों पर बाद में बनाए गए पात्रता मानदंड लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जाता। महासंघ की प्रमुख मांगें महासंघ ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। साथ ही उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभों को पूर्ण संरक्षण दिया जाए। संगठन ने आवश्यकता पड़ने पर संसद में विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को स्थायी राहत देने तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और असुरक्षा की स्थिति का तत्काल समाधान करने की मांग भी की है। जिलेभर से पहुंचे सैकड़ों शिक्षक प्रदर्शन में डीग जिले के सभी छह खंडों से सैकड़ों शिक्षकों ने भाग लिया। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अनिल सीही, जिला मंत्री देवेंद्र यादव, संभाग संयुक्त मंत्री पदम सिंह, सौरभ शर्मा, पुष्पेंद्र सिंह, नरेश यादव, वंशीलाल, जगवीर सिंह, जयसिंह कुंतल, होशियार सिंह, भगत सिंह, संतोष कश्यप, प्रीति खंडेलवाल, सुनीता, रेखा अग्रवाल और सीमा गुप्ता सहित अनेक शिक्षक मौजूद रहे।
