चित्तौड़गढ़ शहर के प्रताप नगर इलाके में मंगलवार सुबह एक दुर्लभ प्रजाति का कैट स्नेक मिलने से लोगों में उत्सुकता का माहौल बन गया। विश्वनाथ कॉलोनी निवासी मुकेश शर्मा के मकान के बाथरूम में यह सांप दिखाई दिया। अचानक सांप नजर आने पर परिवार के लोग घबरा गए, लेकिन उन्होंने उसे नुकसान पहुंचाने की बजाय इसकी सूचना तुरंत चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति को दी। सूचना मिलते ही समिति के सदस्य और सर्प प्रेमी मुबारिक खान मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान उन्होंने सांप की पहचान कैट स्नेक के रूप में की, जिसे चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में बेहद दुर्लभ माना जाता है। दूसरी बार हुआ कैट स्नेक का रेस्क्यू मुबारिक खान ने बताया कि चित्तौड़गढ़ में इस प्रजाति का सांप दूसरी बार रेस्क्यू किया गया है। इससे पहले करीब छह साल पहले उपलापाड़ा निवासी मुकेश समदानी के घर से भी इसी प्रजाति का कैट स्नेक मिला था। उस समय मनीष तिवारी और निखिल वानखेड़े ने रात में उसका सफल रेस्क्यू किया था। ऐसे में एक बार फिर इस दुर्लभ सांप का मिलना वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अच्छा माना जा रहा है। जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोगों में भी इसे देखने की उत्सुकता दिखाई दी और मौके पर काफी संख्या में लोग जमा हो गए। ढाई फीट लंबा सांप सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया मुबारिक खान ने पूरी सावधानी और सुरक्षित तरीके से सांप का रेस्क्यू किया। जांच में यह कैट स्नेक पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। इसकी लंबाई करीब ढाई फीट थी। रेस्क्यू के बाद लोगों को इस सांप के बारे में जानकारी भी दी गई। इसके बाद वन विभाग के नियमों के अनुसार इसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। समिति के सदस्यों ने लोगों से अपील की कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत विशेषज्ञों या संबंधित विभाग को सूचना दें। बिल्ली जैसी आंखों के कारण पड़ा कैट स्नेक नाम कैट स्नेक की सबसे खास पहचान इसकी आंखें हैं, जो बिल्ली की आंखों की तरह बड़ी और चमकदार दिखाई देती हैं। इसी वजह से इसे कैट स्नेक कहा जाता है। यह आमतौर पर रात के समय सक्रिय रहने वाला और काफी शांत स्वभाव का सांप होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आंशिक विषैला होता है, लेकिन इसका विष मुख्य रूप से अपने शिकार के लिए प्रभावी होता है। इंसानों के लिए यह आमतौर पर खतरनाक नहीं माना जाता।