बीजेपी के नए प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार ने शनिवार को औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया। प्रदेश भाजपा कार्यालय के कमरा नंबर-6 से वे संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन करेंगे। यही कमरा पूर्व संगठन महामंत्री चंद्रशेखर का भी कार्यालय रहा है। जयपुर पहुंचने के बाद अजेय कुमार सीधे मोती डूंगरी गणेश मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान गणेश के दर्शन कर नई जिम्मेदारी की शुरुआत की। इसके बाद प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंचने पर महिला मोर्चा और पार्टी कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक राजस्थानी रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किया। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक की और वर्तमान संगठनात्मक अभियानों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान संगठन विस्तार, बूथ सशक्तिकरण और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर भी प्रारंभिक चर्चा की गई। पंचायत-निकाय चुनाव होंगे पहली बड़ी परीक्षा राजस्थान में बीजेपी सरकार बनने के बाद यह पहला मौका होगा, जब स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव नए संगठन महामंत्री के नेतृत्व में लड़े जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में ये चुनाव साल 2028 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माने जा रहे हैं। ऐसे में पंचायत और निकाय चुनावों के परिणाम केवल स्थानीय सत्ता का फैसला नहीं करेंगे, बल्कि यह भी संकेत देंगे कि प्रदेश में बीजेपी सरकार और संगठन के प्रति जनता का रुझान कितना मजबूत है। यही वजह है कि बीजेपी नेतृत्व इन चुनावों को अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहा है। संगठन-सत्ता समन्वय सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरे करने की ओर बढ़ रही है। ऐसे में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना अजेय कुमार की सबसे अहम जिम्मेदारी मानी जा रही है। राजनीतिक तौर पर बीजेपी मानती है कि अगर सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाना है। तो संगठन को और सक्रिय बनाना होगा। इसके लिए बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क, कार्यकर्ता संवाद और जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति तैयार की जा रही है। माइक्रो मैनेजमेंट पर रहेगा फोकस अजेय कुमार को बीजेपी के अंदर बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता संवाद और चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट का विशेषज्ञ माना जाता है। उत्तराखंड में संगठन को मजबूत करने के साथ वहां की चुनावी सफलता में उनकी भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना गया था। राजस्थान में भी उनसे बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, सक्रिय सदस्यता अभियान को गति देने और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की अपेक्षा की जा रही है। पार्टी का मानना है कि मजबूत संगठन ही आगामी चुनावों में जीत की आधारशिला साबित होगा। सरकार रिपीट का लक्ष्य राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड रहा है। बीजेपी का लक्ष्य इस राजनीतिक परंपरा को तोड़ते हुए साल 2028 में फिर से सरकार बनाना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पंचायत और निकाय चुनावों को संगठनात्मक मजबूती की पहली कसौटी माना जा रहा है। अगर इन चुनावों में बीजेपी अच्छा प्रदर्शन करती है। इससे 2028 विधानसभा चुनावों के लिए सकारात्मक माहौल तैयार होगा। राठौड़ बोले- संगठन को मिलेगी नई मजबूती बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने संगठन महामंत्री के आगमन का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने राजस्थान को अनुभवी संगठन महामंत्री दिया है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से संगठन और अधिक मजबूत होगा। राठौड़ ने कहा- आगामी पंचायत-निकाय चुनावों से लेकर 2028 में सरकार दोहराने के लक्ष्य तक संगठन पूरी ताकत के साथ काम करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि अजेय कुमार के नेतृत्व में संगठनात्मक ढांचा और अधिक सक्षम तथा प्रभावी बनेगा। बता दें कि अजेय कुमार ऐसे समय में राजस्थान बीजेपी की संगठनात्मक कमान संभाल रहे हैं। जब पार्टी को एक साथ कई मोर्चों पर तैयारी करनी है। पंचायत और निकाय चुनावों में प्रदर्शन, सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना, बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना और 2028 विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार करना उनकी जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो आने वाले महीनों में अजेय कुमार की कार्यशैली, संगठनात्मक फैसले और चुनावी रणनीतियां न केवल भाजपा के भविष्य की दिशा तय करेंगी, बल्कि यह भी तय करेंगी कि राजस्थान में सत्ता परिवर्तन की परंपरा टूटेगी या फिर कायम रहेगी। पंचायत और निकाय चुनावों के नतीजे ही इस नई संगठनात्मक पारी की पहली सफलता या चुनौती का संकेत देंगे।