कभी जहां दूर-दूर तक केवल रेत, धोरों और बंजर विस्तार का दृश्य दिखाई देता था, वहीं आज हरियाली की लंबी पट्टियां थार के बदलते भू-दृश्य की कहानी कह रही हैं। जैसलमेर के रेगिस्तानी भूभाग में यह बदलाव किसी प्राकृतिक संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि लगभग तीन दशकों से जारी सुनियोजित पर्यावरणीय प्रयासों का असर है। इस परिवर्तन के केंद्र में मोहनगढ़ स्थित 128वीं पैदल वाहिनी (प्रादेशिक सेना) पर्यावरण राज रिफ है, जिसने रेगिस्तान को हरित परिदृश्य में बदलने की अनूठी मिसाल पेश की है। वर्ष 1997 से अब तक बटालियन ने 23,289 हेक्टेयर भूमि पर 2 करोड़ 12 लाख 31 हजार से अधिक पौधे लगाए हैं। यह क्षेत्रफल कई छोटे शहरों के कुल क्षेत्रफल से भी बड़ा है।
