रोडवेज बस का टायर फटने से यात्री का पैर कटने के मामले में जयपुर महानगर प्रथम के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने यात्री के पक्ष में 17,06,457 रुपए का अवार्ड पारित किया हैं। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में रोडवेज की गंभीर लापरवाही मानी। जज श्वेता गुप्ता ने अपने आदेश में कहा कि 30 साल के युवक का पैर कटने से उसे जीवनभर मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ेगा। कोर्ट ने न्यूनतम मजदूरी नियमों के आधार पर पीड़ित की आय, चिकित्सा खर्च, शारीरिक और मानसिक वेदना सहित अन्य मदों का आकलन कर कुल 17,06,457 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि तय की। जिस पर याचिका दायर करने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देय होगा। ट्रिब्यूनल ने रोडवेज प्रशासन को एक महीने में राशि जमा कराने के आदेश दिए। पुराना और घिसा हुआ टायर हादसे का कराण
याचिका में कहा गया था कि जगतपुरा निवासी सुरेश कुमार अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रोडवेज बस में बैठकर जयपुर से कांवट जा रहा था। सुबह करीब साढ़े 11 बजे बडिया की चौकी के पास अचानक तेज धमाके के साथ बस के पीछे का टायर फट गया। टायर इतना पुराना और घिसा हुआ था कि उसकी रबड़ उखड़ चुकी थी। टायर फटने के भयंकर दबाव से बस के फर्श की लोहे की चद्दर फट गई। सुरेश कुमार चूंकि टायर के ठीक ऊपर वाली सीट पर बैठे थे, इसलिए लोहे के टुकड़े और चद्दर सीधे उनके पैरों में जा घुसे और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। चालक ने खोली रोडवेज की पोल
सुनवाई के दौरान रोडवेज प्रशासन ने दलील दी कि यह महज एक अपरिहार्य दुर्घटना थी और इसमें चालक की कोई लापरवाही नहीं थी। परंतु, कोर्ट के सामने खुद रोडवेज बस के चालक महेंद्र कुमार शर्मा ने विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी। जरिह के दौरान चालक ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि बस के टायरों का रोडवेज विभाग द्वारा सही रख-रखाव नहीं करने के कारण ही उक्त टायर रास्ते में फटा और बस का फर्श टूटने से यात्री को चोट आई। चालक के इस बयान से रोडवेज की घोर लापरवाही पूरी तरह प्रमाणित हो गई।