कृषि, पशुपालन, डेयरी, सहकारिता और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े मामलों की समीक्षा करने वाली देश की संसदीय स्थायी समिति का 30 सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार को अमृतसर पहुंचा। समिति के चेयरमैन और वरिष्ठ सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में यह दल तीन दिवसीय पंजाब अध्ययन दौरे पर आया है। श्री गुरु राम दास जी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत के बाद समिति के सभी सदस्य सीधे सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) पहुंचे, जहां उन्होंने माथा टेककर देश और पंजाब की खुशहाली के लिए अरदास की। पीएयू और वेरका मिल्क प्लांट का करेंगे दौरा मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए चेयरमैन चरणजीत सिंह चन्नी ने बताया कि इस प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 30 सांसद शामिल हैं। यह दल पंजाब में कृषि, डेयरी, पशुपालन, सहकारिता और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों का विस्तृत और व्यावहारिक अध्ययन करेगा। अपने इस दौरे के दौरान समिति पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU), लुधियाना का दौरा कर कृषि अनुसंधान और नई तकनीकों की जानकारी लेगी। इसके साथ ही, डेयरी क्षेत्र की बारीकियों और उसकी ग्राउंड रिपोर्ट समझने के लिए वेरका के मिल्क प्लांट का भी विशेष निरीक्षण किया जाएगा। किसानों, पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों से सीधा संवाद चन्नी ने स्पष्ट किया कि समिति का मुख्य उद्देश्य वातानुकूलित कमरों में बैठने के बजाय जमीनी स्तर पर जाकर किसानों, दुग्ध उत्पादकों, पशुपालकों और मत्स्य पालन (Flipping) से जुड़े लोगों से सीधा संवाद करना है। इसका मकसद कृषि क्षेत्र की वास्तविक कमियों, किसानों को आने वाली रोजमर्रा की चुनौतियों और सरकारी योजनाओं की जमीनी प्रभावशीलता को समझना है। इस पूरे अध्ययन की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी, ताकि पंजाब की कृषि को और अधिक लाभकारी और सुरक्षित बनाया जा सके। नकली डेयरी उत्पादों और फसल बीमा पर कड़ा रुख प्रेस वार्ता के दौरान चरणजीत सिंह चन्नी ने बाजार में नकली दूध, सिंथेटिक पनीर, खोया और अन्य मिलावटी डेयरी उत्पादों के बढ़ते काले कारोबार पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समिति इस गंभीर मुद्दे का बारीकी से अध्ययन कर इस पर प्रभावी रोक लगाने के कड़े कानूनी उपायों पर विचार करेगी। फसल बीमा योजना पर बोलते हुए उन्होंने चिंता जताई कि पंजाब में न तो केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना पूरी तरह लागू है और न ही राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था है। समिति इस विषय पर अध्ययन कर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उपाय तलाशेगी। पराली प्रबंधन, एमएसपी की कानूनी गारंटी और विदेश व्यापार पर सुझाव