संदीप पुरोहितनदियां जीवनदायिनी होती हैं। जीवन की सरिता भी उसी के सहारे बहती है। जब वह प्रदूषित हो जाती है तो पूरा इको सिस्टम दम तोड़ने लगता है। जोजरी के लगातार प्रदूषित होने के बाद यही हालात हो गए हैं। यह केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि पर्यावरण, खेती और जीवन का आधार है। वर्षों से यह नदी औद्योगिक प्रदूषण का बोझ ढोह रही है। प्रदूषण केवल नदी को नहीं मारता, बल्कि उससे जुड़ी पूरी जीवन श्रृंखला को प्रभावित करता है। खेतों तक पहुंचने वाला दूषित पानी मिट्टी की उर्वरता घटाता है, फसलों की गुणवत्ता खराब करता है और धीरे-धीरे भूजल को भी जहरीला बना देता है।