पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नेता एक पार्टी का नहीं रहता है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री बनने के बाद वो तमाम पार्टियों का हो जाता है। तमाम पार्टियों के लोग देशवासी और प्रदेशवासी होते हैं। दुर्भाग्य से पीएम मोदी में अभी वो भावना नहीं है। मोदी अभी अपनी ही पार्टी के प्रधानमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। ये नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री बनने के बाद सभी पार्टियों, विचारधाराओं के साथ उनका प्यार मोहब्ब्त का रिश्ता होना चाहिए। आज यह भावना नहीं है, दुर्भाग्य की बात है। गहलोत दिल्ली में राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। राहुल गांधी के आरएसएस- भाजपा से नहीं डरने वाले बयान पर गहलोत ने कहा- ये नई बात क्या है? उन्होंने नई बात थोड़ी कही है। उनका इतना प्रेम है, उनके दिल में देश प्रेम इतना है, दिल की बात जुबान पर आती है। वो चाहते हैं कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में वे हमेशा देशवासियों को आगाह करते हैं। चाहे नोटबंदी हो, कोविड का संकट हो। हर बार उन्होंने देश को आगाह किया। यह नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उनकी ड्यूटी भी है। वे उस ड्यूटी को निभा रहे हैं। आज जो हालात हैं उससे सब चिंतित गहलोत ने कहा- सरकार की आलोचना करो तो जेल जाओ, आप राष्ट्रद्रोही हो। डेमोक्रेसी खतरे में है। धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है। एक धर्म के लोगों को अच्छा भी लगता है। पता नहीं कल उनके लिए यही बातें अच्छी साबित नहीं होंगी। रूस सुपरपावर था उसकके 14 टुकड़े हो गए गहलोत ने कहा- इस माहौल में उनकी भावना है कि देश मजबूत बने, एक रहे, अखंड रहे। इसके लिए इंदिरा गांधी ने जान दे दी। राजीव गांधी शहीद हो गए। इस मुल्क को एक और अखंड रखा। वरना हमारे सामने देखते-देखते रूस जो अमेरिका के मुकाबले का सुपरपावर था। उसके 14 टुकड़े हो गए। अलग-अलग वर्गों के लोगों को सबको प्यार मोहब्बत से रखना चाहिए। इसके लिए जिम्मेदारी विपक्ष के अलावा सत्ता पक्ष की ज्यादा होती है। राजीव गांधी ने पार्टी के विरोध के बावजूद 18 साल के युवाओं को वोटिंग राइट दिया गहलोत ने कहा- राजीव गांधी उस जमाने में पहली बार 21वीं सदी की बात कर रहे थे। 21वीं सदी आने वाली है, तब तक पूरे मुल्क के नागरिकों को अपने आप को तैयार करना चाहिए। इससे नई शताब्दी में प्रवेश करें तो हिंदुस्तान भी दुनिया के दूसरे मुल्कों की श्रेणी में आ सके। यह उनका सपना था। उनके मन में युवा के लिए एक सपना था। इसलिए उन्होंने 18 साल के युवाओं को वोटिंग का अधिकार दिया। पार्टी विरोध के बावजूद भी दिया। एक सपना था कि युवा पीढ़ी ही आने वाले कल के भारत के निर्माता बनेगी। यह सपना आज भी हम सब संजोए हुए है।