ऑनलाइन दवा बिक्री और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दवाइयों पर भारी छूट दिए जाने के विरोध में प्रदेश के मेडिकल स्टोर्स बंद रहे। प्रदेश के कई जिलों में इसका मिला-जुला असर देखने को मिला। लेकिन, उदयपुर में एक मेडिकल स्टोर को बंद करवाने को लेकर विवाद हो गया। एसोसिएशन की ओर से जब मेडिकल शॉप को बंद करवाने को कहा तो बहसबाजी शुरू हो गई। हालांकि लोगों ने मामला शांत करवाया। अजमेर में भी 1200 मेडिल स्टोर बंद रहे। जबकि जयपुर के फिल्म कॉलोनी की 500 दुकानें बंद रही। वहीं, सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के सामने स्थि​त अधिकांश मेडिकल स्टोर खुले नजर आए। जोधपुर में भी मेडिकल स्टोर बंद रहे हालांकि सरकारी हॉस्पिटल के मेडिकल स्टोर और जन औषधी केंद्र के आउटलेट खुले रहे। इसके अलावा ऑनलाइन मेडिसिन भी ग्राहकों को मिल रही है। मेडिकल स्टोर संचालकों की प्रमुख मांगें अवैध ई-फार्मेसी संचालन पर सख्त कार्रवाई
निष्पक्ष एवं संतुलित व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करना
जनस्वास्थ्य सुरक्षा के लिए कड़े नियामकीय प्रावधान लागू करना
जीएसआर 817 (ई) एवं जीएसआर 220 (ई) अधिसूचनाओं को वापस लेना सीएम को भेजा लेटर अजमेर केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव मदन बाहेती ने बताया कि राजस्थान केमिस्ट एलायंस की ओर से इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की गई थी, लेकिन समाधान नहीं होने पर विरोध प्रदर्शन किया गया। अध्यक्ष राजेंद्र मूरजानी ने कहा कि ई-फार्मेसी के जरिए बिना डॉक्टर की उचित जांच और पर्ची के दवाइयां बेची जा रही हैं। फर्जी पर्चियों के माध्यम से एंटीबायोटिक और नशे की श्रेणी में आने वाली दवाओं की बिक्री हो रही है, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई जनरेटेड पर्चियों पर भी शेड्यूल एच-1 की दवाएं बेची जा रही हैं, जो नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने सरकार द्वारा प्राथमिक कृषि साख समितियों को सीमित दवा लाइसेंस देने के प्रस्ताव का भी विरोध जताया। बाहेती ने कहा कि बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां भारी छूट देकर छोटे और मध्यम केमिस्ट कारोबारियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रही हैं। इधर, प्राइवेट हॉस्पिटल एवं नर्सिंग होम सोसायटी अजमेर ने भी केमिस्ट एसोसिएशन की मांगों का समर्थन किया और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।