उदयपुर में आज दोपहर गर्म हवा के थपेड़ों से लोग परेशान नजर आए। पिछले दो दिन के तापमान में गिरावट आई है लेकिन दिन में गर्मी ने आमजन का परेशान कर दिया है। शहर में दोपहर के समय घरों से बाहर निकलने से लोग बचते दिखे, जिससे सड़कों पर वाहनों की संख्या भी कम थी। उदयपुर में 28 अप्रैल को अधिकतम तापमान 40 डिग्री दर्ज हुआ, जो 27 अप्रैल के 42 डिग्री से 2 डिग्री कम रहा। न्यूनतम तापमान में भी गिरावट आई है। 28 अप्रैल को रात का पारा 24 रहा, जबकि 27 अप्रैल को 25.8 था यानि रातें 1.8 डिग्री ठंडी हुईं। शहर में कोर्ट चौराहा पर लगे टेम्प्रचेर डिस्पले पर दोपहर में 2 बजे तापमान 41 डिग्री से. बता रहा था। यहीं तापमान सलूंबर का भी रहा। गुरु नानक स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय उदयपुर के सहायक आचार्य डॉ. आर.एस. देवड़ा बताते है कि उत्तर पश्चिमी भारत मे गर्मी बढ़ने के साथ अधिकतर शहरों मे हिट वेव कि स्थित के साथ ही पक्षिमी विक्षोभ के कारण बादल और खण्ड वर्षा और ओला वर्षा भी हो रही है। उत्तर पश्चिमी राजस्थान मे पक्षिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादल छाये रहने के साथ खण्ड वर्षा होने की संभावना है। मेवाड़ सहित दक्षिणी राजस्थान में अगले दो दिनों तक हिट वेव स्थिति बनी रहेगी।
उन्होंने बताया कि दिन रात का तापमान यथावत बना रहेगा। साथ ही अरब सगरीय नमी व पक्षिमी विक्षोभ के कारण हल्के बादल छाये रहने कि संभावना है दो से तीन दिनों मे हल्की खण्ड वर्षा होने कि भी संभावना है। साथ ही धूल भरी तेज हवाओं का भी असर रहेगा आज से बदला स्कूलों का टाईम
उदयपुर जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने गर्मी के चलते 29 अप्रेल से से 15 मई तक तक विद्यालय समय प्रातः 07.30 बजे से प्रातः 11.30 बजे तक कर दिया। यह आदेश उदयपुर जिले के समस्त राजकीय, निजी सीबीएसई से मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर तत्काल लागू किया गया है। आंगनवाड़ी केंद्रों का समय भी बदला इसी प्रकार 29 अप्रैल 2026 से 15 मई 2026 तक आंगनबाडी केन्द्रों का संचालन प्रातः 07ः30 बजे से 10ः30 बजे तक किया जाएगा। यह आदेश केवल बच्चों के लिए लागू रहेगा। भीषण गर्मी के बीच ठाकुरजी को शीतलता दे रहा फव्वारा
उदयपुर के जगदीश मंदिर में ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए मंदिर में विशेष जल सेवा प्रारंभ की गई है। पुजारी भावेश ने बताया कि इस अवधि में प्रभु के आराम और सुख का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। साथ ही गर्भगृह को ठंडा बनाए रखने के लिए परम्परागत फव्वारा चलाया गया है। इसमें नीचे पानी भरा गया है और ऊपर की तरफ पंखा लगाया गया है। इससे अंदर शीतलता और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
