राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी शुक्रवार को उदयपुर के दौरे पर रहे। यहां पेसिफिक यूनिवर्सिटी में आयोजित एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में शिरकत करते हुए उन्होंने प्रदेश की राजनीति और व्यवस्थाओं को लेकर कई बड़ी बातें कहीं। देवनानी ने साफ तौर पर परिसीमन यानी सीटों के नए सिरे से बंटवारे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि साल 2011 के बाद से देश में न तो जनगणना हुई है और न ही लंबे समय से सीटों का परिसीमन हुआ है, इसे अब जल्द ही किया जाना चाहिए। देवनानी ने एक बड़ा संकेत देते हुए बताया कि परिसीमन के बाद राजस्थान में विधानसभा सीटों का गणित पूरी तरह बदल सकता है। आने वाले समय में प्रदेश में विधायकों की संख्या 200 से बढ़कर 270 होने की पूरी संभावना है। भविष्य की इसी जरूरत को देखते हुए जयपुर में विधानसभा भवन में अभी से तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। देवनानी ने बताया कि विधानसभा की चौथी मंजिल पर एक बड़ा हॉल तैयार किया जा रहा है, जिसमें 280 विधायकों के बैठने की क्षमता होगी। इतना ही नहीं, राजस्थान विधानसभा में भी अब दिल्ली की संसद की तर्ज पर एक ‘सेंट्रल हॉल’ बनाने की योजना पर काम चल रहा है।
देवनानी ने बताया कि आगामी 5 मई को जयपुर में एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। इसमें सात राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष शामिल होंगे। इस सेमिनार में विधानसभा की अलग-अलग समितियों की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने पर मंथन होगा। इसी दिन विधानसभा परिसर में नई बनी हर्बल वाटिका और नक्षत्र वाटिका का लोकार्पण भी किया जाएगा। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि विधानसभा में बने म्यूजियम को देखने के लिए अब तक 50 हजार से ज्यादा लोग आ चुके हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है। वहीं, संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर देवनानी ने बड़ी बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में देश की महिलाएं आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं और हर क्षेत्र में अपनी सहभागिता चाहती हैं। इस मुद्दे पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए और राजनीति से ऊपर उठकर महिलाओं को उनका हक मिलना ही चाहिए।

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