बठिंडा की मंडियों में किसान अपनी गेहूं की फसल का उठान न होने से परेशान हैं। खुले आसमान के नीचे पड़ा गेहूं चोरी होने का खतरा बना हुआ है। कई किसान पिछले 10 दिनों से अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों में बैठे हैं। पंजाब सरकार किसानों को मंडियों में किसी भी तरह की परेशानी न होने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके विपरीत है, जहां किसान अपनी छह महीने की कड़ी मेहनत से उगाई गई फसल को बेचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई मंडियों में तो अभी तक एक भी बोली नहीं लगी है। तलवंडी साबो के गांव मलकाना में किसान कोरा सिंह, हरदीप सिंह और हरकरण सिंह ने बताया कि वे पिछले 10 दिनों से मंडियों में अपनी गेहूं की फसल बेचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। खुले जमीन पर रखनी पड़ रही है फसल किसानों को मंडियों में अपनी फसल रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है, जिसके कारण उन्हें अपनी फसल खुले में जमीन पर ही रखनी पड़ रही है।बठिंडा की अनाज मंडी में भी ऐसे ही हालात हैं, जहां कई किसान कई दिनों से अपनी फसल बेचने के लिए जूझ रहे हैं। हमारी टीम ने बठिंडा की अनाज मंडी का दौरा किया तो पाया कि मंडी गेहूं से भरी हुई थी। अधिकारियों का कहना है कि गेहूं की नई आवक (सरप्लस) के कारण फसलों पर बोली नहीं लगाई जा रही है। हमारी टीम ने बठिंडा और मलकाना गांव का भी दौरा किया, जहां किसान सरकार के दावों और वादों से साफ तौर पर नाराज दिखे। किसानों ने यह भी बताया कि खुले आसमान के नीचे पड़ी गेहूं की फसल को नशेड़ी चुरा ले जाते हैं। उनका आरोप है कि अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।