राजस्थान की महिला किसान के एक प्रयोग ने उन्हें दिल्ली-जयपुर तक पॉपुलर कर दिया है। घर के कमरे में लगाई पहली फसल के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ये प्रयोग था ऑयस्टर मशरूम की फार्मिंग का। किसान यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने मशरूम से अलग-अलग प्रोडक्ट भी बनाना शुरू कर दिए। इनकी डिमांड अब कई बड़े शहरों में हैं। उनकी सालाना इनकम 4 लाख तक पहुंच गई है। म्हारे देश की खेती में इस बार बात सवाई माधोपुर जिले की महिला किसान बीना मीणा की। फार्मिंग का नया तरीका किसान की पहचान बना प्रगतिशील महिला किसान बीना मीणा (65) करौली के नादौती की रहने वाली हैं। अभी गंगापुर सिटी (सवाई माधोपुर) में परिवार के साथ रहती हैं। यहीं पर मकान के दो कमरों में मशरूम की खेती कर रही हैं। करीब ढाई साल पहले पति सीताराम मीणा और बेटे के साथ जोधपुर घूमने गई थी। वहां पहली बार मशरूम की खेती देखी थी। कम जगह और कम मेहनत में अच्छा मुनाफा के बारे में पता चला। वहीं, से खुद भी मशरूम की खेती करने का फैसला किया। गांव लौटने के बाद करौली में एग्रीकल्चर कॉलेज में मशरूम की खेती की ट्रेनिंग ली। एक महीने में फसल, सालाना 3-4 लाख की कमाई बीना बताती हैं – अगस्त 2024 में खेती की शुरुआत की। ऑयस्टर मशरूम में किसी प्रकार के खाद की जरूरत नहीं होती है।आसानी से तैयार होने वाली इस किस्म के बीज पहली बार जयपुर से 130 रुपए प्रति किलो के हिसाब से मंगवाए थे। अभी उन्होंने करीब 400 स्क्वायर फीट के दो कमरों में 80 प्लास्टिक बैग्स में मशरूम लगा रखी है। एक महीने में फसल तैयार हो जाती है। दो महीने में तीन बार तुड़ाई होती है। एक बैग से एक बार में करीब डेढ़ किलो मशरूम निकलती है। मशरूम की सप्लाई करौली के साथ-साथ सवाईमाधोपुर, जयपुर और दिल्ली तक की जा रही है। न कीटनाशक, न सिंचाई की झंझट किसान बताती हैं – मशरूम को बीमारियों से बचाने के लिए पानी में बाविस्टीन पाऊडर मिलाया जाता है। 12 किलो भूसे को 80 लीटर पानी में 10 ग्राम बाविस्टीन पाऊडर डाला जाता है। सर्दियों में तापमान में 15 से कम नहीं होना चाहिए। वहीं गर्मी 30 से अधिक नहीं होना चाहिए। गर्मी में तापमान को बैलेंस करने के लिए कूलर चलाते हैं। कमरे में नमी बनाए रखने के लिए फॉग मशीन लगा रखी है। मीटर से नमी का सही अंदाज लगाते है। सिंचाई का भी झंझट नहीं है और रातभर जागने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस फार्मिंग में किसी कीटनाशक का भी इस्तेमाल नहीं होता है। सर्दियों में बढ़ती है मांग, 200-250 रुपए किलो बिकता है मशरूम की मांग खासकर सर्दियों में ज्यादा रहती है। गीला मशरूम बाजार में यह 200 से 250 रुपए प्रति किलो तक बिक जाता है, जिससे महिला किसान की हर महीने 30 हजार से ज्यादा की इनकम हो जाती है। हेल्दी होने के कारण होटलों से लेकर घरों तक इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। किसान ने बताया- मशरूम का लंबे समय तक उपयोग के लिए इसे पहले सुखाया जाता है। इसके बाद इससे अचार और प्रोटीन तैयार किया जा रहा है। अचार ₹600 किलो और 100 ग्राम पाउडर 150 रुपए तक बिक रहा है। सम्मान भी मिला, किसान सीखने आ रहे बीना मीणा बताती हैं – उनके इस नवाचार को लेकर उन्हें समय-समय पर प्रोत्साहित किया गया है और सम्मान भी मिला है। कृषि विभाग से लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सम्मानित किया है। अब कई किसान हमारे पास मशरूम उत्पादन के गुर सीखने के लिए आते हैं। — खेती-किसानी से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… खेती का तरीका बदला, 2 महीने में 8 लाख कमाए:शिमला मिर्च और जुकिनी की खेती कर ट्रेंड सेट किया, जानिए- राजस्थान के किसान का सीक्रेट जब पारंपरिक फसलों ने जवाब दे दिया और मेहनत के बदले घाटा मिलने लगा, तो बहरोड़ के खेड़की गांव के सुनील यादव (48) ने हार मानने के बजाय रास्ता बदलने का फैसला किया। पूरी खबर पढ़िए
