अमृतसर में बढ़ती बेसहारा पशुओं की संख्या गंभीर समस्या बनती जा रही है। इन जानवरों का खुलेआम सड़कों और चौराहों पर घूमना न सिर्फ ट्रैफिक जाम का कारण बन रहा है, बल्कि सड़क हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, पंजाब के प्रसिद्ध गायक राजवीर जवंदा एक बेसहारा पशु से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा न केवल चिंताजनक है, बल्कि हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। सरकार और प्रशासन जल्द ध्यान दें अमृतसर के रहने वाले इंजीनियर पवनदीप शर्मा ने इस विषय पर चिंता जताते हुए बताया कि अमृतसर में करीब 4 हजार से ज्यादा बेसहारा पशु खुले में घूमते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में हर महीने 30 से ज्यादा लोग ऐसे ही हादसों में जान गंवा देते हैं। शर्मा ने मांग की है कि नगर निगम, प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं की एक संयुक्त टीम बनाई जाए, जो इन जानवरों की गिनती करें, उनके ठिकानों की पहचान करें, और स्थायी गोशालाएं बनाकर उन्हें वहां शिफ्ट करें। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इन जानवरों के गले में रंग-बिरंगी टेप (लाल, पीली, सफेद) बांधी जाए, ताकि वे रात या धुंध में भी दूर से नजर आ सकें। उन्होंने कहा, “समस्या का हल तभी होगा जब काम तेजी से और सही दिशा में किया जाएगा। सिख विद्वान अमनदीप सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशुओं की समस्या अब जनता की सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन चुकी है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इस पर तुरंत ध्यान दें और स्थायी समाधान निकालें, ताकि और जानें जोखिम में न पडें। सीनियर डिप्टी मेयर प्रियंका शर्मा सीनियर डिप्टी मेयर प्रियंका शर्मा ने इस मुद्दे पर कहा, “हम पहले से ही इस समस्या को लेकर गंभीर हैं। जब भी किसी इलाके से बेसहारा पशुओं की शिकायत आती है, हमारी नगर निगम की टीम तुरंत उन्हें पकड़कर नजदीकी गोशाला में भेज देती है।”
