राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) द्वारा घोषित कक्षा 12वीं कला वर्ग (Arts) के परीक्षा परिणामों में झुंझुनूं जिले की छात्रा नैन्सी चौधरी ने राज्य की मेरिट सूची टॉप रही है। नैन्सी ने कुल 500 अंकों में से 498 अंक प्राप्त कर 99.60 प्रतिशत का स्कोर खड़ा किया है।
नैंसी झुंझुनूं धनूरी नयाबास गांव की निवासी है।
उनके पिता तेजेंद्र कुमार किसान है। गांव ही अपनी जमीन खेती करते है। माता कौशल्या गृहणी है।
नैन्सी डिफेंस पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, झुंझुनूं की छात्रा हैं। रिपोर्टर: नैन्सी आपने राजस्थान बोर्ड में टॉप-3 में जगह बनाई है और दो विषयों में तो आपने 100 में से 100 अंक हासिल किए हैं। आपकी इस शानदार सफलता के पीछे तैयारी का क्या तरीका (पैटर्न) रहा? आपका टाइम-टेबल क्या था?
नैन्सी चौधरी: मेरा टाइम-टेबल थोड़ा अलग था। मैं रात को ज्यादा पढ़ना पसंद करती थी क्योंकि दिन में थोड़ा शोर-शराबा या डिस्टरबेंस रहता है। जब रात को सब सो जाते थे, तब शांत माहौल में मेरी पढ़ाई बहुत अच्छे से होती थी। मेरा पूरा फोकस रात के समय पर ही रहता था। रिपोर्टर: आजकल के छात्रों के लिए सोशल मीडिया और मोबाइल सबसे बड़ा भटकाव (Distraction) हैं। आपने इनसे दूरी कैसे बनाई? आपकी क्या रणनीति थी और आप अन्य छात्रों को क्या संदेश देना चाहेंगी? नैन्सी चौधरी: मेरा मानना है कि जब आप पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हों, तो सोशल मीडिया से दूर रहना ही सही है। यह वाकई में एक बहुत बड़ा डिस्टरबेंस है। मेरे माता-पिता ने भी शुरू से ही मुझे मोबाइल से दूर रखा। थोड़े समय के लिए इस्तेमाल करना ठीक है, लेकिन पढ़ाई के दौरान इससे दूरी बनाना ही सफलता के लिए बेहतर है। रिपोर्टर: अक्सर देखा जाता है कि होनहार छात्र ‘साइंस’ की तरफ भागते हैं, लेकिन आपने ‘आर्ट्स’ (कला वर्ग) को चुना। इसके पीछे आपकी क्या सोच थी और भविष्य के क्या सपने हैं? नैन्सी चौधरी: मेरा लक्ष्य आगे जाकर UPSC (सिविल सेवा) की तैयारी करना है। आर्ट्स का सिलेबस यूपीएससी के लिए बहुत मददगार होता है। अगर मैं अभी से आर्ट्स के विषयों को अच्छे से पढ़ लेती हूँ, तो भविष्य में मेरी तैयारी की नींव मजबूत हो जाएगी। इसीलिए मैंने साइंस छोड़कर आर्ट्स को चुना। रिपोर्टर: क्या पढ़ाई के दौरान कभी आपको तनाव (Stress) महसूस हुआ? स्कूल के स्टाफ और माता-पिता का इसमें कैसा सहयोग रहा? नैन्सी चौधरी: सच कहूँ तो मुझे कभी भी पढ़ाई का बोझ या तनाव महसूस नहीं हुआ। न तो स्कूल की तरफ से कोई दबाव था और न ही माता-पिता ने कभी जबरदस्ती ‘पढ़ो-पढ़ो’ कहा। उनका हमेशा सपोर्ट रहा, जिसकी वजह से मैं बिना किसी मानसिक दबाव के आज यहाँ तक पहुँच पाई हूँ। रिपोर्टर: राजस्थान के हजारों छात्र आपको एक आदर्श के रूप में देख रहे हैं। उन्हें सफलता के लिए आप क्या ‘मूल मंत्र’ देना चाहेंगी? नैन्सी चौधरी: मेरा बस एक ही संदेश है— बहुत ज्यादा रिसोर्सेज या अलग-अलग किताबों के पीछे मत भागिए। अपनी NCERT की किताबों पर पूरा भरोसा रखें और उन पर फोकस करें। अगर आप एनसीईआरटी को बार-बार पढ़ेंगे, तो चीजें दिमाग में बैठ जाएंगी। पेपर भी उसी में से आते हैं, इसलिए अगर आपकी बेस बुक मजबूत है, तो आपको कहीं और भटकने की जरूरत नहीं है।