झालावाड़ में जिला स्तरीय फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टास्क फोर्स की बैठक सोमवार को मिनी सचिवालय सभागार में आयोजित हुई। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का उद्देश्य किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना औरि वितरण व्यवस्था को पारदर्शी व सुचारू बनाना था। जिला कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आगामी कृषि सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को निर्धारित दरों पर ही उर्वरक मिलें और कालाबाजारी या अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग के अधिकारियों को नियमित रूप से उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। उन्हें स्टॉक, वितरण और मूल्य सूची का भौतिक सत्यापन करने तथा उर्वरकों की उपलब्धता, मांग व आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी रखते हुए उच्चाधिकारियों को सूचित करने को कहा गया। बैठक में डीएपी के स्थान पर राज्य में उत्पादित सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के अधिक उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, एनपीके कॉम्प्लेक्स और जैविक खादों जैसे वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ाने तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए। गर्मियों में मृदा की उर्वरता बढ़ाने के लिए ढैंचा जैसी हरी खाद के उपयोग पर भी बल दिया गया। संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार झालावाड़, डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की मांग कृषि आयुक्तालय राजस्थान, जयपुर को भेजी जा चुकी है। वर्तमान में जिले में 16940 मीट्रिक टन यूरिया, 3726 मीट्रिक टन डीएपी, 27648 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट और 3194 मीट्रिक टन एनपीके कॉम्प्लेक्स उपलब्ध है। जिले में 29 मार्च से 31 मार्च तक उर्वरक विक्रेताओं के सघन निरीक्षण का कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। किसानों की शिकायतों के रिकॉर्ड संधारण और उन्हें उर्वरक उपलब्ध कराने में सहयोग के लिए जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। असामयिक वर्षा से फसल नुकसान पर किसान 72 घंटे में दें सूचना
जिले में हुई असामयिक वर्षा के कारण रबी सीजन की फसलों, विशेषकर गेहूं की कटी हुई फसल को नुकसान होने की संभावना है। वर्तमान में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में गेहूं की कटाई का कार्य जारी है। कई स्थानों पर थ्रेसिंग कार्य प्रारंभ हो चुका है। संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले के लिए एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड को अधिसूचित किया है। राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार जिन किसानों ने अपनी फसल का बीमा करवाया है, उन्हें फसल कटाई के बाद 14 दिनों की अवधि तक विशेष सुरक्षा प्रदान की है। इस अवधि में यदि फसल खेत में सुखाने के लिए कटी हुई अवस्था में फैलाई है और उस दौरान असामयिक वर्षा, चक्रवात, चक्रवाती वर्षा या ओलावृष्टि से नुकसान होता है, तो किसान व्यक्तिगत आधार पर बीमा क्लेम के लिए पात्र होंगे। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें किसी भी प्रकार के नुकसान की स्थिति में तुरंत जानकारी दर्ज कराएं, जिससे उन्हें समय पर बीमा लाभ प्राप्त हो सके।