पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व सेक्रेटरी मनजीत सिंह को अग्रिम जमानत दे दी है। 10 दिनों के अंदर जांच में शामिल और जांच अधिकारी का पूरा सहयोग करने का आदेश दिया है। मनजीत सिंह पर 2011-2016 के बीच SGPC की कस्टडी से 328 पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब स्वरूप गायब होने, उनकी अवैध छपाई, जालसाजी और करीब 9.82 लाख रुपये के गबन के आरोप लगे थे। 2025 में दर्ज हुआ था मामला
अमृतसर के थाना डिवीजन-C में 7 दिसंबर 2025 को दर्ज FIR नंबर 168 सिख सद्भावना दल के बलदेव सिंह ने शिकायत की थी। आरोप था कि SGPC सचिव रहते हुए मनजीत सिंह ने अन्य लोगों के साथ मिलकर पवित्र स्वरूपों की लापरवाही बरती, जालसाजी की और पैसे का गबन किया। IPC की धाराएं 295, 409, 465, 120-B और गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम 2008 भी लगाए गए थे। अदालत में कहा झूठा फंसाया
मनजीत सिंह के वकील ने कोर्ट में कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। वे 2023 में बेदाग रिकॉर्ड के साथ रिटायर्ड हुए थे। उस समय उनका प्रिंटिंग विभाग से कोई लेना-देना नहीं था। जांच में भी उन पर केवल लापरवाही का आरोप लगा था, गबन का नहीं। अदालत ने इसलिए दी जमानत
1. आरोप केवल लापरवाही के प्रतीत होते हैं, किसी आपराधिक इरादे या गबन के नहीं। 2. FIR में 9 साल की देरी हुई है। 3. सबूत मुख्य रूप से दस्तावेजी हैं, इसलिए हिरासत जरूरी नहीं। 4.शिकायत SGPC द्वारा नहीं, बल्कि तीसरे पक्ष द्वारा की गई थी।
