जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क के ब्रीडिंग सेंटर में इस महीने गोडावण के चार नए चूजों का जन्म हुआ है। आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन और प्राकृतिक प्रजनन के जरिए यह सफलता मिली है। इससे संरक्षण केंद्रों में गोडावण की कुल संख्या बढ़कर 72 हो गई है। वन विभाग और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयासों से यह काम किया जा रहा है। असंभव को संभव बनाती AI तकनीक वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती गोडावण की बेहद धीमी प्रजनन दर रही है। मादा गोडावण साल भर में अमूमन एक ही अंडा देती है, जिसके प्राकृतिक रूप से सुरक्षित बचने की संभावना काफी कम होती है। इस बार वन विभाग ने ‘अमन’ और ‘सम’ के जरिए आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन का सफल प्रयोग किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में गोडावण की आबादी को ‘मल्टीप्लाई’ करने में गेम-चेंजर साबित होगी। नाम नहीं, उम्मीदों के प्रतीक हैं ‘फाइनेक्स’ और ‘लिओ’ जैसलमेर के रामदेवरा और सूदासरी ब्रीडिंग सेंटर में हाल ही में हुए दो जन्मों ने वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह भर दिया है। DFO बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि एक चूजा ‘फाइनेक्स’ और ‘लिओ’ गोडावण की जोड़ी से प्राकृतिक तरीके से जन्मा है। इन पक्षियों को दिए गए ये नाम उनकी मॉनिटरिंग और वैज्ञानिक डेटा संग्रह में मदद करते हैं। यह सफलता न केवल राजस्थान बल्कि वैश्विक स्तर पर पक्षी संरक्षण के लिए एक बड़ा उदाहरण है। संकट से सफलता तक का सफर: मुख्य आंकड़े घास के मैदानों की सुरक्षा और भविष्य की राह वन विभाग और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के साझा प्रयासों से संचालित इन सेंटर्स में अंडों के इनक्यूबेशन से लेकर चूजों की परवरिश तक के लिए ‘इंटरनेशनल प्रोटोकॉल’ फॉलो किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब सेंटर में संख्या पर्याप्त हो जाएगी, तो इन्हें सॉफ्ट-रिलीज प्रक्रिया के जरिए फिर से खुले आसमान में छोड़ने की योजना है। “यह संरक्षण प्रयासों की बड़ी उपलब्धि है। AI तकनीक से प्रजनन की सफलता ने हमें एक नया रास्ता दिखाया है। हमारा लक्ष्य इस दुर्लभ प्रजाति को विलुप्ति की श्रेणी से बाहर निकालना है।”— बृजमोहन गुप्ता, DFO, डेजर्ट नेशनल पार्क बिजली की तारों को भूमिगत करना जरुरी- सुमेर सिंह पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह सांवता ख़ुशी जताते हुए बताते हैं- गोडावण का बढ़ना केवल एक संख्यात्मक वृद्धि नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन की जीत है। यदि हम बिजली के तारों के भूमिगत होने और शिकार जैसी बाहरी चुनौतियों पर भी इसी तरह लगाम कस सके, तो वह दिन दूर नहीं जब जैसलमेर के आसमान में गोडावण की ‘उड़ान’ फिर से आम बात होगी। ये खबर भी पढ़ें… राजस्थान पहला राज्य, जहां AI से जन्मा गोडावण का चूजा:सेंटर में संख्या बढ़कर 70 हुई; केंद्रीय मंत्री बोले- बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहे राजस्थान के जैसलमेर जिले के सम-सुदासरी स्थित गोडावण कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में राज्यपक्षी गोडावण के दो नए चूजों का जन्म हुआ है। इन नन्हे मेहमानों के आने के साथ ही केंद्र में गोडावणों की संख्या बढ़कर 70 तक पहुंच गई है। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। (खबर पढ़ें)
