यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ मिनरल प्रोड्यूसर्स (UFMP) ने दावा किया है कि आज भी अरावली का बहुत बड़ा हिस्सा सुरक्षित है। उनका मानना है कि अरावली के मात्र 1 प्रतिशत हिस्से पर ही खनन हो रहा है और वह हिस्सा भी देश की प्रगति, जीडीपी ग्रोथ, रोजगार में सहायक बना हुआ है। उदयपुर में यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ मिनरल प्रोड्यूसर्स के जुड़े खनन उद्यमियों एवं पदाधिकारियों संरक्षक अरविंद सिंघल, मुख्य सलाहकार जे.पी. अग्रवाल, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के पूर्व सीईओ अखिलेश जोशी, UFMP के अध्यक्ष गुरप्रीतसिंह सोनी, सचिव डा. हितांशु कौशल, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट केजार अली कुराबड़वाला ने एक मंच पर आकर इस बारे में अपनी बात रखी। पहाड़ियों को चीर कर बनाए अवैध रिसोर्ट-होटल निर्माण की गतिविधियां बंद हो उदयपुर में शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन पदाधिकारियों का कहना है कि संगठन का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि देश में अवैध खनन गतिवधियां, पहाड़ियों को चीर कर बनाये गये अवैध रिसोर्ट, अवैध होटल निर्माण की गतिविधियां बंद होनी चाहिये। अवैध खनन की आड़ में वैध खनन को टारगेट किया जा रहा है। संगठन का मुख्य उद्देश्य कानून सम्मत, वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी खनन को बढ़ावा देना है ताकि वैध खनन गतिविधियां जारी रह सकें और साथ ही पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन एवं आर्थिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ मिनरल प्रोड्यूसर्स के अध्यक्ष गुरप्रीतसिंह सोनी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के 20 नवंबर 2025 के निर्णय में कानून के अनुरूप वर्तमान खनन गतिविधियों को जारी रखने की अनुमति दी गई थी, परंतु 29 दिसंबर 2025 के आदेश द्वारा उक्त निर्णय को स्थगित किए जाने से खनन क्षेत्र में पुनः अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है। सोनी ने कहा कि 21 जनवरी 2026 की सुनवाई के बाद भी पट्टों के नवीनीकरण एवं विस्तार को लेकर स्पष्टता का अभाव उद्योग, रोजगार एवं राज्य राजस्व के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। सोनी ने बताया कि राजस्थान भारत के सर्वाधिक खनिज संपन्न राज्यों में से एक है, जहां 58 प्रकार को खनिजों का उत्पादन होता है, जबकि राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का मात्र 0.68ः क्षेत्र ही खनन के अंतर्गत है। अखिलेश जोशी ने कहा कि बिना खनन के कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता है। खनन में नुकसान कम और प्रगति अधिक है। संगठन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास परस्पर विरोधी नहीं बल्कि पूरक उद्देश्य हैं। मुख्य सलाहकार जे.पी. अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान के समग्र विकास, औद्योगिक प्रगति, रोजगार सृजन एवं राष्ट्रीय खनिज सुरक्षा के लिए संतुलित एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। अरावली क्षेत्र में तथ्यपरक, डेटा-आधारित और संतुलित नीति बनाकर पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन विकास दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है, जिससे राज्य और राष्ट्र दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
सचिव डॉ. हितांशु कौशल ने कहा कि खनन उद्योग राजस्थान की आर्थिक रीढ़ है। नीतियां वैज्ञानिक तथ्यों, भूवैज्ञानिक वास्तविकताओं तथा क्षेत्र-विशिष्ट आकलन के आधार पर बननी चाहिए, क्योंकि खनिज केवल खनिजीकृत क्षेत्रों तक सीमित होते हैं और एक समान मापदंड सभी क्षेत्रों पर लागू नहीं किया जा सकता। इस अवसर पर यूसीसीआई उदयपुर के अध्यक्ष मनीष गलुण्डिया, महेश मंत्री, हरीश अरोड़ा गौरव राठौड़, श्याम सिंह, अर्जुन जैन, राम उपाध्याय, सुरेन्द्र सिंह राजपुरोहित, नानालाल सारदुल सहित विभिन्न जिलों एवं अलग-अलग खनन एवं औद्योगिक संगठनों के सदस्य मौजूद थे।
