माघ मास के शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें दिन मनाए जाने वाली जया एकादशी 29 जनवरी को मनाई जाएगी। भगवान विष्णु के साथ-साथ देव गुरु बृहस्पति को भी समर्पित रहेगा। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं। मानसिक शांति मिलती है आैर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन श्रद्धालु जहां अपने घर पर व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करेंगे। वहीं शहर के मंदिरों में भी व्रती दान-पुण्य कर कथा सुनेंगे। मंदिरों में भजन कीर्तन जैसे कार्यक्रम भी होंगे। एकादशी तिथि का बुधवार को शाम 16:35 बजे से हो गया। इसके बाद यह तिथि गुरुवार को दोपहर 13:55 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के कारण जया एकादशी का व्रत गुरुवार को रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि आैर रवि योग का संयोग भी बन रहा है। एकादशी व्रत का पारण 30 जनवरी को सुबह 7:10 से 9:20 बजे के बीच किया जा सकता है। ज्योतिषी सुभाष व्यास के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी के साथ ही भीष्म एकादशी भी कहा जाता है। कथा है कि महाभारत के युद्ध के दौरान धर्मराज युधिष्ठिर जब सामने खड़ी कौरव सेना में शामिल अपने ही संबंधियों से युद्ध करने को लेकर असमंजस में थे, तब श्रीकृष्ण उन्हें लेकर शर शैय्या पर क्षत-विक्षत पड़े भीष्म पितामह के पास लेकर पहुंचे थे। तब भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को विष्णु सहस्त्र नाम का उपदेश दिया था। ऐसी मान्यता है कि इस जया एकादशी का व्रत रखने वालों को विष्णु सस्त्रनाम का पाठ करने से बाधाओं और पापों से मुक्ति शत्रु विजय के साथ सुख, सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में ऐसा बताया गया है कि जो एकादशी का व्रत करता है भगवान उससे प्रसन्न रहते है तथा घर में सुख सुविधा से भर देते है। भगवान के प्रताप से सभी साधकों के दुख दर्द मिट जाते है। बड़ा से बड़ा भी संकट केवल छोटे रूप में रह जाता है। भगवान भक्त की रक्षा करते है।
