एसीबी की ओर से जल जीवन मिशन में हुए घोटाले के संबंध में अनुसंधान के बाद सोमवार को न्यायालय में 10 अभियुक्तों के खिलाफ करीब 16000 पेज की चार्जशीट तैयार की। इस चार्ज शीट को एसीबी के अधिकारियों ने 54 लाल रंग के बंडलों में जयपुर के झालाना स्थित एसीबी मुख्यालय से एसीबी कोर्ट पहुंचाया। 16 हजार पेजों के ये चार्जशीट दिनेश गोयल, के डी गुप्ता, सुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, निरिल कुमार, विशाल सक्सेना, अरूण श्रीवास्तव, डी. के. गौड, महेन्द्र प्रकाश सोनी और मुकेश पाठक प्राईवेट व्यक्ति जिन्हे एसीबी द्वारा गिरफ्तार किया गया और वर्तमान में न्यायिक हिरासत में चल रहें है, के विरुद्ध करीब 16 हजार पेज का आरोप पत्र (चार्जशीट) प्रस्तुत किया गया है। इस संबंध में इनके विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति प्राप्ति हेतु एसीबी द्वारा रिपोर्ट तैयार कर विभाग को प्रेषित की जाएगी और अन्य शेष सभी के विरूद्ध अनुसधान जारी है। मामले में जितेंद्र शर्मा (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर), मुकेश गोयल (सुपरिटेंडेट इंजीनियर) और संजीव गुप्ता (प्राईवेट व्यक्ति) के विरुद्ध जारी स्थायी वारट (Standing Warrant) की तामील हेतु ब्यूरो की टीमों द्वारा विभिन्न स्थानो पर लगातार दबिश दी जा रही है और इनकी संपत्ति का विवरण संकलित कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। साथ ही इनकी संपत्ति अटैचमेन्ट (कुर्क) की कार्यवाही करवाई जाएगी। वहीं आज सुबोध अग्रवाल, सेवानिवृत्त आईएएस को न्यायालय में पुलिस कस्टडी (PC) हेतु पेश किया गया। एसीबी कोर्ट ने अनुसंधान अधिकारी महावीर शर्मा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सुनने के बाद सुबोध अग्रवाल सेवानिवृत्त आईएएस का दो दिन का पुलिस रिमांड स्वीकृत किया गया है। वहीं हाईकोर्ट में इस प्रकरण से सम्बधित 11 रिटों में हाल आगामी सुनवाई की तिथि 21 अप्रैल निर्धारित की गई है। बता दें कि सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी से पहले 16 फरवरी को कुल 10 अफसरों को पकड़ा। इसके बाद 10 अफसरों को 18 फरवरी को कोर्ट में पेश किया था। इन्हें कोर्ट में पेश किया गया चीफ इंजीनियर जयपुर शहर केडी गुप्ता तत्कालीन मुख्य अभियंता पीएचईडी परियोजना जयपुर दिनेश गोयल रिटायर्ड तकनीकी चीफ इंजीनियर जयपुर डीके गौड तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, निरिल कुमार निरिल कुमार तत्कालीन वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा अतिरिक्त मुख्य अभियंता शुभांशु दीक्षित रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता महेन्द्र प्रकाश सोनी तत्कालीन अधिशाषी अभियंता विशाल सक्सेना मुकेश पाठक, छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार फर्जी बिल और वित्तीय गड़बड़ियों का मामला एसीबी ने जल जीवन मिशन के तहत हुए कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान जयपुर, बाड़मेर, जालोर, सीकर, बिहार, झारखंड और दिल्ली सहित कुल 15 स्थानों पर छापेमारी की गई थी। जांच में फर्जी बिल, वित्तीय गड़बड़ियों और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं के साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। एसीबी अधिकारियों के अनुसार, मामले की गहन जांच जारी है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं। जांच में मिला भ्रष्टाचार जेजेएम घोटाले में एसीबी की ओर से इस संबंध में साल-2024 में केस दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि इसमें फर्म मैसर्स श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी प्रोपराइटर महेश मित्तल और फर्म मैसर्स श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी प्रोपराइटर पदमचंद जैन शामिल है। इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर PHED के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल कर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया। SIT चार अहम मामलों की जांच कर रही जेजेएम घोटाले में एसीबी की ओर से बनाई गई SIT चार अहम मामलों की जांच कर रही है। 20 हजार करोड़ के स्पेशल प्रोजेक्ट को लेकर यह जांच चल रही है। टेंडर्स में नियम-शर्त बदलकर बड़ी फर्मों को अनुचित लाभ देने की कोशिश की गई है। साइट इंस्पेक्शन की शर्त लगाई, जिससे यह पता चला कि कौन-कौन फर्मं टेंडर्स में भाग ले रही हैं। इसके कारण पारदर्शिता पूरी तरह भंग हो गई। हालांकि वित्त विभाग की ओर से इन टेंडर्स को रद्द कर दिया गया था। एसीबी विशेष शर्त लगाने वाले इंजीनियर्स पर शिकंजा कस रही है। 55 करोड़ का फर्जी पेमेंट किया श्रीश्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म को बिना काम के 55 करोड़ रुपए के फर्जी पेमेंट किए गए थे। इसमें 139 इंजीनियर जांच के दायरे में हैं। इसमें 15 एक्सईएन, 40 एईएन और 50 जेईएन शामिल हैं। पिछली सरकार में इरकॉन कंपनी के नाम से फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर 900 करोड़ के टेंडर जारी किए गए। ये टेंडर श्रीश्याम और गणपति ट्यूबवेल फर्म को दिए गए। जब मामला खुला तो जांच के लिए एक्सईएन विशाल सक्सेना ने केरल जाकर झूठी रिपोर्ट पेश की थी। इरकॉन के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट बनाने में कौन-कौन से इंजीनियर्स की भूमिका है, इसकी एसआईटी जांच कर रही है।