जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में स्थित पटाखों की फैक्ट्री में मंगलवार सुबह 11 बजे भीषण आग लग गई। अग्निकांड में दो भाइयों समेत आठ लोगों की मौत हो गई। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि यहां कई साल से 55 गज के मकान में पटाखों की अवैध फैक्ट्री चल रही थी। दिन के 400 से 500 रुपए देकर युवाओं को मौत के मुंह में धकेला जाता था। पुलिस और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। दिल्ली के कुछ लोग ये फैक्ट्री चला रहे थे। यहां पटाखों के लिए बारूद रिफिलिंग का काम चल रहा था। पटाखे दिल्ली सप्लाई किए जाते थे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… बिलाल सिलाई, समीर नगीनों का काम करता था अग्निकांड में अब्दुल वाहिद (50), राबिल (16), बिलाल खान (30), समीर (20), आजीम खान (18) उर्फ आविद, अशरफ (40), नासिर खान (25) और एक अन्य की मौत हो गई। खोह नागोरियान इलाके में सिलाई का काम करने वाले मोहम्मद नासिर ने बताया कि आजीम कुछ महीनों से फैक्ट्री में काम कर रहा था। बड़ा बेटा बिलाल भी आज काम के सिलसिले में गया था। उन्होंने बताया कि बिलाल वैसे तो सिलाई का काम करता था, लेकिन इन दिनों काम ज्यादा नहीं था। ऐसे में काम के लिए वह वहां चला गया था। मोहम्मद नासिर ने बताया कि बिलाल की दो छोटी बच्चियां हैं। उन्हें हादसे के बारे में कुछ भी नहीं पता है। उन्होंने बताया कि बच्चे सुबह काम पर जाकर शाम को लौटते थे। 400-500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से पैसा मिलता था। मृतक समीर के भाई मोहम्मद साद ने बताया कि मुझे फोन पर आग लगने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचा तो पता चला समीर अंदर ही फंसा हुआ है। किसी तरह उसे बाहर निकालकर एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया। मोहम्मद साद ने बताया कि समीर जो काम मिल जाए, वो करता था। आज ही फैक्ट्री में काम करने के लिए गया था। आमतौर पर वो लोग ज्यादातर नगीनों का काम करते थे। मृतक अब्दुल वाहिद के पिता अब्दुल अजीज और भाई जाकिर ने बताया कि कुछ साल से अब्दुल वाहिद वहां पर काम करता था। अब्दुल वाहिद को करीब 12 से 15 हजार रुपए प्रति माह वेतन मिलता था। कई साल से चल रही थी अवैध फैक्ट्री इस फैक्ट्री में काम कर चुके फरहान ने बताया कि फैक्ट्री में पटाखे तैयार किए जाते थे। कई साल से फैक्ट्री चल रही थी। दिल्ली के रहने वाले वसीम, शोएब और आसिफ फैक्ट्री चला रहे थे। आयशा नगर, तलाई और करीम नगर में अलग-अलग फैक्ट्री चल रही थी। विधायक अमीन कागजी ने लगाए आरोप विधायक अमीन कागजी ने कहा- ये प्रशासन का कम्प्लीट फेल्योर है। मामले में जो भी सक्षम अधिकारी थे, उन सब पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा- कुछ लोगों ने बताया कि किसी लोकल आदमी ने दिल्ली के लोगों को अपनी जगह किराए पर दे रखी थी। अगर ऐसा है तो लाइसेंस अथॉरिटी ने अब तक ध्यान क्यों नहीं दिया। बगैर हेलमेट के होने पर तो चालान कर दिया जाता है। अवैध फैक्ट्री पर कार्रवाई क्यों नहीं की। … यह खबर भी पढ़ें… जयपुर- पटाखा फैक्ट्री में आग,2 भाइयों समेत 8 की मौत:जलने के बाद सड़क पर तड़पते रहे; दिल्ली का युवक चला रहा था अवैध फैक्ट्री
