बारां जिले में किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसके तहत 50 किसानों का राज्य स्तरीय शैक्षणिक भ्रमण दल सोमवार को रवाना हुआ। प्रभारी सचिव हरिमोहन मीणा और अतिरिक्त जिला कलेक्टर भंवरलाल जनागल ने किसानों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर अधिकारियों ने किसानों से संवाद किया और जिले में बांस उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने किसानों से भ्रमण के दौरान प्राप्त आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को अपने खेतों में अपनाने का आह्वान किया। उद्यान विभाग के उपनिदेशक पुष्पेंद्र खींची ने बताया कि राष्ट्रीय बांस मिशन का मुख्य उद्देश्य उद्योगों को गुणवत्तापूर्ण कच्चा बांस उपलब्ध कराना, किसानों की आय में वृद्धि करना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और कुटीर एवं हस्तशिल्प उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत बारां जिले को वर्ष 2026-27 तक 10 हेक्टेयर क्षेत्र में 4 हजार बांस पौधों के रोपण का लक्ष्य मिला है। चार दिवसीय इस भ्रमण के दौरान किसान बांस उत्पादन, पौधारोपण, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का अध्ययन करेंगे। यह दल चित्तौड़गढ़ के सीताफल उत्कृष्टता केंद्र, झाड़ोल स्थित रामकुंडा ओगणा, कोटड़ा की फूलवारी की नाल बांस नर्सरी, कृषि विज्ञान केंद्र सिरोही, स्वरूपगंज स्थित बांस सेलिंग प्वाइंट, गोगसंद घाटा देवला रेंज और राजस्थान कृषि महाविद्यालय उदयपुर सहित विभिन्न संस्थानों का अवलोकन करेगा। बांस की खेती को कम लागत और कम रखरखाव वाली दीर्घकालिक फसल माना जाता है। एक बार पौधारोपण के बाद इससे कई वर्षों तक नियमित उत्पादन प्राप्त होता है। फर्नीचर, हस्तशिल्प, निर्माण कार्य, कागज और अगरबत्ती उद्योगों में इसकी लगातार मांग बनी रहती है। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत किसानों को पौध सामग्री, बगीचा स्थापना और तकनीकी मार्गदर्शन की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में बांस की खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों के लिए आय के नए स्रोत विकसित होंगे। साथ ही, ग्रामीण रोजगार, कुटीर उद्योग और बांस आधारित उद्यमों को भी नई मजबूती मिलेगी।