एसीएस शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों के एक ही कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदने के मामले में उठे विवाद में एसीबी की भी एंट्री हो गई है। एसीबी ने मामले में प्राथमिक इंक्वायरी (PE) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। IAS शिखर अग्रवाल पर पद के दुरुपयोग और निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद इस मामले में अब जांच शुरू हो गई है। 29 अक्टूबर की आधी रात को राजस्थान सरकार ने आईएएस शिखर अग्रवाल को सभी पदों से हटाते हुए एपीओ कर दिया था। सुबह एसीबी डीजी सीएस से मिले, फिर पीई दर्ज एसीबी डीजी गोविंद गुप्ता ने शुक्रवार को सुबह मुख्य सचिव वी श्रीनिवास से मुलाकात कर इस मामले में चर्चा की थी। मुख्य सचिव ने इस मुलाकात की फोटो को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि एसीबी डीजी के साथ मुलाकात कर भष्ट्राचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति को अमलीजामा पहनाने के बारे में विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि मुख्य सचिव से एसीबी डीजी की शिखर अग्रवाल मामले में सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद एसीबी में पीई दर्ज कर ली गई। प्रभाव का दुरुपयोग करने का मामला आईएएस शिखर अग्रवाल की ओर से निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों से कथित आपराधिक मिलीभगत कर अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए स्वयं एवं संबंधित कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने और राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने के तथ्य प्रथम दृष्टया सामने आए हैं। डीजी (एसीबी) गोविन्द गुप्ता ने बताया – 27 अक्टूबर को दैनिक भास्कर जयपुर संस्करण में प्रकाशित खबर और उद्योग विभाग से प्राप्त तथ्यात्मक रिपोर्ट का ब्यूरो द्वारा समग्र परीक्षण एवं विश्लेषण किया गया। इसके अतिरिक्त गोपनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर प्राथमिक जांच दर्ज की गई। कंपनी को रिसोर्ट निर्माण की शर्तों में छूट दी प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शिखर अग्रवाल ने राजस्थान में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थापन के दौरान जिला कलेक्टर, उदयपुर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं अन्य विभागों के पदों पर रहते हुए कथित रूप से अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से विला-कॉटेज खरीदे, जो ‘अनंता’ नाम से होटल एवं रिसोर्ट संचालित करती है। शिखर अग्रवाल ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटे के निदेशकों से मिलीभगत कर कंपनी को रिसोर्ट निर्माण संबंधी शर्तों में अनुचित छूट, आवश्यक प्रमाण-पत्रों की जांच के बिना स्वीकृतियां तथा विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिलयाकर अनुचित लाभ पहुंचाया। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि शिखर अग्रवाल की ओर से उक्त कंपनी के संचालकों से कथित मिलीभगत कर स्वयं एवं अपने परिजनों के नाम पर उदयपुर के बुझड़ा स्थित अनंता रिसोर्ट में मार्च 2026 में 20 विला और अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता ली गई। पत्नी के नाम पर अलग-अलग विला उदयपुर स्थित बुझड़ा रिसोर्ट में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 10-10 विला 15-15 लाख रुपए में खरीदे हैं, जबकि अलवर के अजबगढ़ के अनंता रिसॉर्ट में अग्रवाल एवं उनकी पत्नी के नाम पर 8 विला 16.5-16.5 लाख रुपए में, दोनों बेटों के नाम पर 4 विला लगभग 15-15 लाख और सास-ससुर के नाम पर 4 विला लगभग 16.5-16.5 लाख रुपए में खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। इन संपत्तियों का खरीद कथित तौर पर बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर किया गया। गोपनीय सूत्रों से सामने आया है कि वित्त विभाग की ओर से प्राइवेट कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज 27 मार्च को जारी किया गया। उसी दिन शिखर अग्रवाल की ओर से 20 विला की रजिस्ट्री करवाई गई है। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया कि शिखर अग्रवाल की ओर से अपने पदस्थापन के दौरान निजी कंपनी के निदेशकों के साथ कथित आपराधिक मिलीभगत कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इसके अतिरिक्त खुद के और परिजनों के नाम पर कथित रूप से आय से अधिक परिसंपत्तियां अर्जित किए जाने के तथ्यों की भी विस्तृत जांच किया जाना आवश्यक पाया गया। ये भी पढ़ें… विला-कॉटेज खरीद मामला,IAS शिखर अग्रवाल को सभी पदों से हटाया:IPS पत्नी के साथ खरीदी थी प्रॉपर्टी, फिर उसी कंपनी को लीज पर दी क्यों गिरी शिखर अग्रवाल पर गाज?:33 साल की नौकरी में पहली बार एपीओ, सरकार का क्लियर मैसेज, क्या संपत्ति खरीदना गलत? आसान सवालों में जानिए गहलोत बोले- शिखर अग्रवाल की CBI-ED से जांच करवाएं:एपीओ करने से काम नहीं चलेगा; सरकार के 3 साल में यह सबसे बड़ा घोटाला