भास्कर न्यूज | जालंधर सिविल अस्पताल में इन दिनों मुख्यमंत्री हेल्थ बीमा के नए कार्ड बनाने और आयुष्मान की ई-केवाईसी का काम चल रहा है। अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी और वार्डों में दाखिल मरीजों के नए कार्ड बनाए जा रहे हैं, ताकि जरूरतमंदों को इलाज का लाभ मिल सके। वहीं, दूसरे लोगों के लिए आयुष्मान कार्ड की केवाईसी करने का काम किया जा रहा है, जो दूसरे लोगों को किया जा रहा है। यहां पर सुबह से लोग हेल्थ बीमा कार्ड बनाने के लिए पहुंच जाते हैं, लेकिन 50 फीसदी लोगों के डॉक्यूमेंट में गड़बड़ी होने पर निराश होकर लौटना पड़ता है। इस वजह से काफी लोग काउंटर पर डॉक्यूमेंट का पता करने आते हैं, और फिर कार्ड बनाने के लिए आते हैं। इस वजह से उनका दो से तीन बार चक्कर लगाना पड़ता है। इस वजह से डॉक्यूमेंट सही नहीं होने से दोपहर 12:30 बजे तक एक हेल्थ कार्ड की केवाईसी हो सकी। सोमवार को 3 बजे तक 10 से 12 नए और पांच की केवाईसी काम हो सका। सिविल अस्पताल में सुबह दस बजे काउंटर पर लोगों की लाइन लगने लगती है, लेकिन विडंबना यह है कि 50 फीसदी लोग दस्तावेजों में कमी या तकनीकी गड़बड़ी के कारण निराश होकर वापस लौट रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डॉक्यूमेंट सही न होने की वजह से एक दिन दोपहर एक बजे तक केवल एक ही कार्ड की केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो सकी। लोगों को छोटी-छोटी जानकारी के अभाव में अस्पताल के दो से तीन बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। काउंटर के मुलाजिम के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या आधार कार्ड का अपडेट न होना है। पुराने आधार कार्ड होने की वजह से लोगों के बायोमेट्रिक (अंगूठे के निशान) मैच नहीं हो रहे हैं। इसके अलावा, मोबाइल नंबर का आधार से लिंक न होना, वोटर कार्ड में जन्मतिथि का गलत होना और अधूरे फॉर्म भरना मुख्य बाधाएं हैं। सिविल अस्पताल में हेल्थ बीमा कार्ड के लिए काउंटर पर लोगों की कतार। ये मिल रहीं कमियां .डॉक्यूमेंट मिसमैच्ड हैं। .बायोमैट्रिक अंगूठा नहीं लगता है, आधार कार्ड अपडेट नहीं है। .मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होना। .आधार कार्ड पुराना होने पर अपडेट नहीं हैं। .वोटर कार्ड में कई लोगों की जन्म तिथि गलत आ रही है। .फार्म अधूरे भरकर ला रहे लोग।