राजस्थान हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों पर अव्यवस्थित पार्किंग और ट्रैफिक प्रभावित के मुद्दे पर कड़ा रूख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य के सभी नगर निकायों को पार्किंग प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। साथ ही सभी नगरपालिकाओं से दो महीने में अनुपालन रिपोर्ट भी पेश करने को कहा गया है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि बढ़ते वाहनों के कारण शहरों में सड़क किनारे अनियंत्रित पार्किंग एक गंभीर समस्या बन चुकी है। इसलिए नगर निकायों को कानून के तहत पार्किंग शुल्क निर्धारित कर नियमन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यह सुनवाई वरिष्ठ न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश प्रवीर भटनागर की खंडपीठ में अमृत नगर, पाल रोड क्षेत्र के निवासियों की याचिका पर हुई। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने स्थानीय स्वशासन विभाग के सचिव की अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने कहा- पार्किंग के लिए रिजर्व जगह दूसरे यूज के लिए नहीं होगी रिपोर्ट में बताया गया कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम-2009 के तहत नगर निकायों को पार्किंग शुल्क लगाने, सार्वजनिक स्थानों पर पार्किंग नियंत्रित करने और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने के पर्याप्त अधिकार प्राप्त हैं। सरकार ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि मॉडल राजस्थान भवन विनियम-2025 में सभी प्रकार के भवनों के लिए अनिवार्य ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग, विजिटर पार्किंग, ईवी चार्जिंग सुविधा और पार्किंग के दुरुपयोग पर कार्रवाई जैसे प्रावधान किए गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पार्किंग के लिए आरक्षित स्थान का किसी अन्य उपयोग के लिए इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। स्थानीय निकाय ऐसे अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकृत हैं। खंडपीठ ने स्थानीय स्वशासन विभाग के निदेशक को निर्देश दिए कि वे दो महीने में सभी नगर निकायों की विस्तृत रिपोर्ट शपथपत्र के साथ पेश करें। इस रिपोर्ट में यह भी बताया जाना है कि किन निकायों ने पार्किंग शुल्क और नियमन लागू किया है। जहां यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है, वहां उसकी वर्तमान स्थिति क्या है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनिता गहलोत ने पैरवी की।