राजस्थान हाईकोर्ट ने आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की विवादित संपत्तियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना को वन मैन कमीशन नियुक्त करने संबंधी आदेश रद्द कर दिया है। जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। हालांकि कोर्ट ने संपत्तियों पर जारी अटैचमेंट और स्टेटस-क्वो (यथास्थिति) के अंतरिम आदेशों में हस्तक्षेप नहीं किया है। यह आदेश मेघा टाक और अन्य की विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया गया। इन अपीलों में विवादित संपत्तियों को लेकर पारित अंतरिम आदेशों और बाद में गठित विशेष समिति के आदेश को चुनौती दी गई थी। अपीलकर्ताओं ने तर्क दिया कि कुछ संपत्तियां तीसरे पक्ष की हैं और लिक्विडेटर को उन्हें अटैच करने का अधिकार नहीं है। इसके समर्थन में कला चौहान बनाम राजस्थान सरकार मामले के निर्णय का भी हवाला दिया गया। कोर्ट ने अटैचमेंट की वैधता पर कोई अंतिम राय देने से इनकार किया केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया- अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को पक्षकारों की सहमति से हुआ आदेश बताया था। हालांकि खंडपीठ ने पाया कि 28 जुलाई के आदेश में सेवानिवृत्त सीजेआई को विवादों के निस्तारण के लिए नियुक्त करने के संबंध में पक्षकारों के बीच किसी विशिष्ट सहमति का उल्लेख नहीं था। कोर्ट ने कहा- मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटीज एक्ट, 2002 में विवादों के निस्तारण की वैधानिक व्यवस्था निर्धारित है। कोर्ट ने इस स्तर पर अटैचमेंट की वैधता पर कोई अंतिम राय देने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह मुद्दा पहले से ही एकलपीठ के समक्ष लंबित है। हालांकि संपत्तियों की सुरक्षा के लिए 9 जुलाई 2026 की स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। लिक्विडेटर को अंतरिम आदेश के जरिए संपत्तियों के मालिक के नाम में बदलाव करने से भी रोका गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाद का अंतिम निस्तारण लंबित रिट याचिकाओं में एकलपीठ द्वारा ही किया जाएगा।
