सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत शर्मा ने जोधपुर में कहा- अदालतों को एक अस्पताल की तरह व्यवहार करने की आवश्यकता है। जैसे अस्पताल में कोई बीमार व्यक्ति जाता है तो उसकी उत्सुकता बढ़ी होती है। उसको डर भी होता है कि जीवन बचेगा या नहीं। मुझे क्या किस्म की बीमारी है, इस बीमारी का इलाज होता भी है या नहीं। जोधपुर दौरे पर रविवार को आए सीजेआई सूर्यकांत शर्मा ने जिला न्यायलय महानगर की नई बिल्डिंग का लोकार्पण करते हुए यह कहा। उन्होंने कहा- मैं बार मैंबर्स से यह अपील करना चाहूंगा। यह बात पहले भी कई बार अलग-अलग कार्यक्रमों में कही है, आज फिर दोहरा रहा हूं। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और राजस्थान हाइकोर्ट लॉयर्स एसोशिएशन के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि न्यायालयों का इंफ्रास्टक्चर बेहतर होना चाहिए। इसके लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। सीजेआई) सूर्यकांत शर्मा ने कहा- जब बीमार व्यक्ति अस्पताल में जाता है तो कोई पैरामेडिकल स्टाफ है, एक्सरे से लेकर ब्लड टेस्ट करने वाला कोई टेक्निशियन उसके साथ प्यार से थोड़ी बात कर लेते हैं। साथ में आपको बड़ी यह विश्वास दिला देते हैं कि आपको बड़ी बीमारी नहीं है और स्वस्थ हो जाएंगे। डॉक्टर कह देता है कि आपकी बीमारी का इलाज उपलब्ध है। आप स्वस्थ होकर घर जाएंगे तो मुझे लगता है कि उस मरीज की आधी बीमारी उसी समय खत्म हो जाती है। ऐसे ही आपके पास कोई व्यक्ति न्याय की गुहार लेकर आता है तो उसकी परिस्थिति भी उस बीमार जैसी होती है। उसको अदालत के परिसर में बैठने का स्थान मिले, पीने का पानी मिले और उसका वकील बात करके हौसला दिलाए कि कानून आपके हक में है और किस धारा के तहत कैसे चलेगा। बार और बेंच को मिलकर काम करने की जरूरत सीजेआई ने कहा- न्याय की गुहार लेकर आए व्यक्ति की समय पर सुनवाई हो, मानवीय व्यवहार हो और ज्यूडिशयल अधिकारी आत्मीयता से बातचीत करें तो उसका भी आधे से ज्यादा दर्द वहीं दूर हो जाएगा। मानवीय मूल्यों के आधार पर हमारी न्याय प्रणाली करे। इसके लिए बार और बेंच दोनों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। इसके लिए हमें हमारा दृष्टिकोण, विचार और पुरानी व्यवस्था को नए आयाम में जाने की जरूरत है। इसलिए एक कंपलिट माइंडसेट चेंज करके और खासकर दूर-दराज के गांव से अपने किसी अधिकार की गुहार करने आने वाले गरीब आदमी को समय पर और एफोर्डेबल तरीके से न्याय मिले। इंफ्रास्ट्रक्चेर पर जल्द ही आएगी रिपोर्ट उन्होंने कहा- देश की न्यायपालिका को क्या-क्या इंफ्रास्ट्रक्चेर की जरूरत का साइंटिफिक स्टडी के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज की अध्यक्षता में समिति गठित की हुई है। 31 अगस्त तक आ सकती है। उस रिपोर्ट के आधार पर मैं केंद्र और राज्य सरकार से निवेदन करूंगा कि न्यायपालिका की जो आवश्यकताएं हैं, वो पूरी की जाएं। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों को किया संबोधित इससे पहले सीजेआई नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) के 25वें स्थापना दिवस के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने छात्रों को संबोधित किया। अपने संबोधन में एनएलयू जोधपुर को 25 साल पूर्ण करने पर बधाई देते हुए कहा कि रजत जयंती केवल अतीत की उपलब्धियों का उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा निर्धारित करने का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यूनिवर्सिटी के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 16 से 18 तक Vice-Chancellors’ Conclave 2.0 का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्क्लेव के उद्घाटन समारोह में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मुख्य अतिथि और न्यायाधीश संदीप मेहता, न्यायाधीश विजय बिश्नोई उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने की। समारोह में विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी,भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी सहित राजस्थान उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश उपस्थित रहे।