जैसलमेर के रेगिस्तान में आर्टिफिशियल झील तैयार की गई है। जलदाय विभाग (PHED) का दावा है कि इस जिगजैग झील से जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में 365 दिन पानी सप्लाई की जा सकेगी। 28 किमी लंबी यह झील 33 फीट गहरी है। दावा है कि इस झील को पार (एक से दूसरे छोर) करने में करीब 24 घंटे का समय लगेगा। रेगिस्तानी मिट्टी इसमें भरा पानी न सोख ले, इसके लिए इसमें नीचे 300 माइक्रोन की स्पेशल प्लास्टिक शीट बिछाई गई है। जो पानी को जमीन में जाने से रोकती है। इसमें इंदिरा गांधी नहर से आया बारिश का पानी स्टोर किया जाएगा। इसके बाद फिल्टर प्लांट से बाड़मेर-जैसलमेर के घरों में पहुंचाया जाएगा। इससे 50 लाख की आबादी को एक साल तक लगातार पानी दिया जा सकेगा। पढ़िए भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास घंटियाली (जैसलमेर) में बनी झील की यह स्टोरी… झील की जरूरत क्यों पड़ी… PHED के अधिशाषी अभियंता (XEN) रामपाल मूंधियाड़ा ने बताया- बॉर्डर इलाकों में साल में एक बार 1 महीने के लिए नहर रखरखाव के लिए नहरबंदी की जाती है। इसके कारण इन (बाड़मेर-जैसलमेर) इलाकों में पानी की समस्याएं आती हैं। अब तक ऐसा कोई बड़ा स्टोरेज भी नहीं था जहां पानी को रोककर नहरबंदी के समय में यूज लिया जा सके। पानी की समस्या और स्टोरेज नहीं होने के कारण इसकी आवश्यकता पड़ी। 2024 में हुई थी काम की शुरुआत XEN रामपाल मूंधियाड़ा ने बताया- नहरबंदी को लेकर आने वाली समस्या के चलते साल 2024 में इसकी शुरुआत हुई थी। अब यह बन गई है। पंजाब के रास्ते होते हुए आने वाली इंदिरा गांधी नहर से इसे जोड़ा गया है। इसे बनाने के लिए 400 मजदूर और 10 इंजीनियर की टीम ने काम किया। इसे सचिन कंस्ट्रक्शन कंपनी और गुडविल एडवांस कंस्ट्रक्शन कंपनी ने मिलकर बनाया। इसे इंदिरा गांधी नहर से कनेक्ट करने के लिए पहले से एस्केप चैनल मौजूद था, लेकिन पक्का नहीं था। यहां इंदिरा गांधी नहर में पानी भरने के बाद आगे छोड़ दिया जाता था। ऐसे में इसी एस्केप चैनल को मजबूत कर झील और नहर से जोड़ा। एक साल के पानी का बैकअप XEN रामपाल मूंधियाड़ा ने बताया- झील 28 किलोमीटर लंबी है। इसके तल (पेंदा) का एरिया 71 लाख स्क्वायर मीटर है। इसे जमीन के अंदर 10 मीटर (लगभग 33 फीट) तक खोदा गया है। इसकी भराव क्षमता 1413 मिलियन क्यूबिक फीट है। इसमें एक साल के बैकअप के लिए 141 करोड़ लीटर पानी स्टोर किया जा सकता है। अगर एक इंसान इसको देखने जाए तो उसे इसे घूम कर आने में पूरा एक दिन लग जाएगा। संभवत: डेजर्ट एरिया होने के चलते यह एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है। इतना बड़ा खाली इलाका कहीं और नहीं है। झील में बिछाई शीट, पानी जमीन न सोख ले रेगिस्तान में सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि यहां की रेतीली मिट्टी पानी को बहुत तेजी से सोख लेती है। अगर इस झील में सीधा पानी भरा जाता तो करोड़ों लीटर पानी जमीन के नीचे रिस कर गायब हो जाता। पूरी झील के निचले हिस्से (बेस) में जमीन के नीचे 300 माइक्रोन की स्पेशल प्लास्टिक शीट बिछाई गई है। यह मजबूत प्लास्टिक लेयर पानी को नीचे रिसने से पूरी तरह रोकती है। इस जिगजैग झील में 76 लाख स्क्वायर मीटर प्लास्टिक बिछाया गया है। इसमें HDPE प्लास्टिक शीट यानी हाई डेंसिटी पोलिथिलीन का यूज किया गया है। इस प्लास्टिक पर 80 सेमी यानी ढाई फीट मिट्टी की परत बिछाई गई है। इससे यह 100 साल तक खराब नहीं होगी। इसकी ये खासियत भी है कि इसके ऊपर बिछाई मिट्टी बदली भी जा सकेगी। एक्सेस पानी को झील में भरेंगे XEN रामपाल मूंधियाड़ा ने बताया- मानसून के दिनों में जब पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश होती है, तब इंदिरा गांधी नहर में क्षमता से ज्यादा पानी आ जाता है। बारिश के दिनों में खेतों में पानी होने के कारण किसानों को भी सिंचाई के लिए नहर के पानी की जरूरत नहीं होती। इसी समय नहर के एक्स्ट्रा बहने वाले (एक्सेस) पानी को मोड़कर इसमें भर दिया जाएगा। इसके लिए करीब 1KM का एस्केप चैनल बनाया गया है। इसके 2 गेट हैं, इसमें एक गेट इंदिरा गांधी नहर से पानी आने के लिए और दूसरा झील में पानी डालने के लिए खोला जाएगा। फिल्टर होकर घरों तक जाएगा पानी XEN रामपाल मूंधियाड़ा ने बताया- एस्केप चैनल के जरिए बारिश के पानी से जब झील भर जाएगी, तब इसमें इंटेक वेल में से डेढ़-डेढ़ मीटर (60 इंच) के 4 पाइप से सप्लाई आगे दी जाएगी। इन पाइप के जरिए पानी को पंप करके पहले मोहनगढ़ फिल्टर प्लांट भेजा जाएगा। फिल्टर प्लांट में पानी को पूरी तरह साफ और शुद्ध किया जाएगा। इसके बाद इसे पाइपलाइन के जरिए जैसलमेर और बाड़मेर के घरों में सप्लाई किया जाएगा। यह बाड़मेर-जैसलमेर की करीब 50 लाख की आबादी को 365 दिन लगातार पानी दे सकती है।