रूपनगर (रोपड़) हेडवर्क्स पर औद्योगिक प्रदूषण के गंभीर मामले को लेकर पंजाब मोर्चा ने स्थानीय आम आदमी पार्टी के विधायक दिनेश चड्ढा के दावों और हालिया सक्रियता पर तीखे सवाल उठाए हैं। पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने विधायक की इस कार्रवाई को ‘जाती हुई सरकार का राजनीतिक स्टंट’ करार देते हुए उन पर केवल कागजी वाहवाही लूटने का आरोप लगाया है। संयोजक गौरव राणा ने विधायक दिनेश चड्ढा द्वारा दिए गए उस बयान पर कड़ा तंज कसा, जिसमें विधायक ने कहा था कि उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को “सोए हुओं को जगाकर” रात को मौके पर बुलाया। राणा ने सवाल दागते हुए कहा, “अगर अधिकारी सोए थे तो उन्हें जगाना अच्छी बात है, लेकिन यह सोचने वाली बात है कि पिछले साढ़े चार साल से खुद माननीय विधायक जी इस गंभीर मुद्दे पर क्यों सोए हुए थे? उन्हें इतने लंबे समय बाद अचानक रूपनगर के पानी की याद क्यों आई?” उन्होंने विधायक की इस देरी से हुई कार्रवाई की मंशा पर सवाल उठाए। पंजाब मोर्चा ने जुलाई में ही उठाया था मुद्दा गौरव राणा ने दावा किया कि प्रदूषण के इस गंभीर मामले को सबसे पहले उनके संगठन ने उजागर किया था। पंजाब मोर्चा ने गत 20 जुलाई को ही हिमाचल प्रदेश की ओर से आ रहे काले जहरीले पानी और औद्योगिक प्रदूषण के मुद्दे को प्रमुखता से जनता और प्रशासन के सामने रखा था। इसके तुरंत बाद संगठन की लीगल टीम ने इस प्रदूषण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी थी। सीमावर्ती फैक्ट्रियों पर सिर्फ खानापूर्ति का आरोप पंजाब मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब-हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों, जैसे ‘गोलथाई’ की केमिकल फैक्ट्रियों और अन्य औद्योगिक इकाइयों से लगातार आ रहे खतरनाक रासायनिक प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर प्रशासन और सरकार द्वारा अब तक केवल कागजी और खानापूर्ति वाली कार्रवाई की गई है, जिसका खामियाजा स्थानीय जनता को भुगतना पड़ रहा है। हिमाचल एंट्री टैक्स और टोल नाके पर मांगा जवाब गौरव राणा ने विधायक दिनेश चड्ढा को हिमाचल एंट्री टैक्स और प्रस्तावित टोल नाके के मुद्दे पर भी घेरा। उन्होंने पूछा कि पिछले महीने जिला परिषद में इस संबंध में प्रस्ताव पास करवाने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन वह प्रस्तावित टोल नाका आज तक जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दिया? पंजाब मोर्चा के संयोजक ने दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि पंजाब के पर्यावरण और अमूल्य पानी से जुड़े संवेदनशील मामलों में अब और बयानबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार और स्थानीय विधायक को केवल सुर्खियां बटोरने के बजाय धरातल पर ऐसे ठोस कानूनी परिणाम दिखाने चाहिए, जिससे इस औद्योगिक प्रदूषण पर हमेशा के लिए लगाम लगाई जा सके।