राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में अब ‘मैसेज अलर्ट सिस्टम’ के जरिए करोड़ों का फर्जीवाड़ा रोका जा रहा है। RGHS कार्ड धारक का महीनेभर में कितनी दवाई का बिल बना, इसका उसे मैसेज अलर्ट भेजा जा रहा है। एक रिटायर्ड IAS ने इसी मैसेज अलर्ट से एक फार्मेसी का फर्जीवाड़ा पकड़ लिया। RGHS कार्ड से मुफ्त जांच के लिए भी मोबाइल OTP अनिवार्य कर दिया गया है। वेरिफाई करने के बाद ही जांच करने वाली लैब का बिल मंजूर होगा। ‘मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना’ में भी इस सिस्टम को लागू किया गया है। मुफ्त में दवा लेने के बाद मरीज को मैसेज भेजा जा रहा है कि उसे कितने रुपए की दवा मुफ्त दी गई है। हेल्थ डिपार्टमेंट का मानना है कि इस सिस्टम से बिना कार्ड धारक की जानकारी के उसके खाते से एक रुपया भी क्लेम करना मुश्किल होगा। पढ़िए ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट…. मैसेज अलर्ट सिस्टम तीन तरीके से मुफ्त दवा योजनाओं में फर्जीवाड़ा रोकने का काम कर रहा है। 1. महीने के पहले सप्ताह में पूरा ‘हिसाब-किताब’
RGHS में राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को मेडिकल सुविधाएं दी जाती हैं। प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज कराने पर खर्च का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। लेकिन सिस्टम की कमजोरियों को समझकर कई डॉक्टर्स, अस्पताल संचालक और मेडिकल स्टोर्स ने फर्जी बिल बनाकर सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया था। अब हर महीने के पहले सप्ताह में कार्ड धारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक मैसेज भेजा जाएगा। इस मैसेज में पिछले महीने का पूरा ब्योरा होगा। OPD में डॉक्टर को दिखाने के बाद दवाओं पर खर्च का कितना क्लेम उठा। मेडिकल स्टोर से कुल कितने रुपए की दवाइयां ली गईं। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान कुल कितना खर्च दिखाया गया। इससे कार्ड धारक को तुरंत पता चल जाएगा कि उसके नाम पर कहीं कोई फर्जी क्लेम तो नहीं उठा रहा है। मैसेज में यह भी पता चलेगा कि भर्ती रहने के दौरान कौन सी बीमारी का इलाज किया गया है, ताकि किसी और बीमारी के इलाज का अतिरिक्त खर्च जोड़ने पर कार्डधारक तुरंत शिकायत दर्ज करा सके। केस स्टडी : रिटायर्ड IAS ने पकड़ी चालाकी, 150 की दवाई ली, मैसेज आया 8 हजार का
एक रिटायर्ड IAS अधिकारी ने डॉक्टर को दिखाने के बाद जनवरी में मेडिकल स्टोर से RGHS योजना के तहत 150 रुपए की दवा खरीदी। महीना खत्म होते ही फरवरी के पहले सप्ताह में मोबाइल पर मैसेज आया कि पिछले महीने आपकी दवाओं का खर्च आठ हजार रुपए आया है। एक बार तो अधिकारी ने मैसेज इग्नोर कर दिया। लेकिन शक हुआ कि आखिर दवाओं का खर्च 8 हजार रुपए कैसे हुआ? क्योंकि पिछले महीने तो सिर्फ 150 रुपए की ही दवा ली थी। गड़बड़ी लगने पर पूर्व अधिकारी ने आरजीएचएस में संपर्क किया। जब जांच हुई तो सामने आया कि संबंधित मेडिकल स्टोर ने फर्जी बिल बनाए थे। फार्मेसी को योजना से ब्लॉक कर दिया गया है। फार्मेसी से दवाएं लेने पर कार्ड धारक को ओटीपी देना पड़ता है। लेकिन इसी दौरान फार्मेसी संचालक द्वारा फर्जीवाड़ा करते हुए कार्ड होल्डर के अकाउंट में अन्य दवाओं को भी शामिल करते हुए क्लेम पेश कर दिया गया था। 2. जांच करानी है तो OTP से होगी वेरिफाई
RGHS के तहत जांचें मुफ्त में की जाती हैं। उसके बिल का भुगतान सरकार करती है। अक्सर यह शिकायतें मिल रही थीं कि डॉक्टर की पर्ची में मरीज को लिखी गई जांचों के अलावा भी एक्स्ट्रा जांच का बिल उठाया जा रहा है। इस बारे में मरीज को पता भी नहीं चलता था। अब हेल्थ डिपार्टमेंट हर जांच से पहले OTP की अनिवार्यता लागू करने जा रहा है। किसी भी जांच के लिए कार्ड धारक के मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। जब तक मरीज वह ओटीपी नहीं देगा, तब तक उसका क्लेम वेरिफाई नहीं होगा। इससे मरीजों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके नाम पर कौन-कौन सी जांचें पोर्टल पर चढ़ाई गई हैं। 3. मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में भी मैसेज अलर्ट
आरजीएचएस की तर्ज पर ही अब मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा लेने वाले मरीजों को भी अब मोबाइल पर मैसेज मिलने शुरू हो गए हैं। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि किसी मरीज ने सरकारी अस्पताल से जो नि:शुल्क दवाएं ली हैं, आखिर उसका कितना खर्च सरकार उठा रही है। आखिर इस कवायद की जरूरत क्यों पड़ी?
आरजीएचएस में कुछ डॉक्टर, अस्पताल और फार्मा स्टोर संचालक फर्जी बिल बनाकर करोड़ों का क्लेम उठा रहे हैं। कई कार्डधारकों को इसकी जानकारी तक नहीं होती थी। योजना में गड़बड़ी करने वाले अस्पताल और फार्मेसी के खिलाफ अब तक 19 एफआईआर दर्ज करवाई जा चुकी हैं। फर्जीवाड़ा करने वाले 7 डॉक्टर्स सहित 64 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। करीब 500 कार्ड भी ब्लॉक किए गए हैं। इसी तरह 33 अस्पतालों का लेनदेन (ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम) ब्लॉक कर दिया है। 39 अस्पतालों का भुगतान रोक दिया है। साथ ही, 8 अस्पतालों को RGHS से बाहर कर दिया गया है। फर्जीवाड़ा करने वाले अस्पतालों से 32 करोड़ से अधिक की राशि वसूल की गई है। इसी प्रकार 212 फार्मेसी का टीएमएस (ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम) ब्लॉक किया गया और इनसे 5 करोड़ से अधिक की राशि वसूल की गई। राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि जांच रिपोर्ट में यह तथ्य गंभीर रूप से उजागर हुआ है कि कई मामलों में मरीजों को आवश्यकता से अधिक जांचें लिखी गईं तथा जांच रिपोर्टों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में सामने आया कि कुछ मरीजों के लिए HbA1c, RA Factor, Procalcitonin जैसी जांचें बिना जरूरत के करवाई गई। रिकॉर्ड में आवश्यक चिकित्सीय औचित्य स्पष्ट नहीं था। कुछ मामलों में पोर्टल पर न तो HbA1c टेस्ट की रिपोर्ट उपलब्ध थी और न ही ओपीडी स्लिप पर डॉक्टर ने ऐसी कोई जांच लिखी थी। कई जगहों पर डॉक्टरों के फर्जी साइन और सील लगाकर बिल उठाए गए। ——– सरकारी स्कीम में गड़बड़ी की यह खबर भी पढ़िए… मुफ्त इलाज योजना में फर्जीवाड़ा, सुशीला को बनाया सुशील, मेडिकल स्टोर-डॉक्टर्स की मिलीभगत से करोड़ों का चूना राजस्थान के सरकारी कर्मचारियों के लिए बनी मुफ्त इलाज योजना (आरजीएचएस) में करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा सामने आया है। डॉक्टर और मेडिकल स्टोर संचालक मिलकर फर्जी बिल बनाकर उन दवाइयों का भुगतान उठा रहे थे, जो कभी बेची ही नहीं गई। पढ़ें पूरी खबर…
