बरनाला जिले के कस्बा धनौला में पुलिस की कथित ढुलमुल कार्यप्रणाली से परेशान होकर पंजाब पुलिस के एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) सब-इंस्पेक्टर ने अपने पूरे परिवार के साथ थाना धनौला के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। यह पूरा मामला खेतों की सिंचाई के लिए लगी एक पानी की मोटर के अधिकार और कब्जे को लेकर चल रहे पारिवारिक व किसान यूनियन के विवाद से जुड़ा हुआ है।थाने के बाहर पूर्व पुलिसकर्मी के धरने पर बैठने की खबर फैलते ही इलाके के अन्य रिटायर्ड पुलिसकर्मी भी अपने साथी के समर्थन में धरना स्थल पर जुटना शुरू हो गए हैं। “पत्नी के नाम पर है मोटर, यूनियन ने जबरन तोड़ा ताला”: पूर्व थानेदार भूख हड़ताल पर बैठे रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर रजिंदर सिंह ने मीडिया को बताया कि वे अपनी पत्नी को मायके से मिली पैतृक संपत्ति के आधार पर अपने ससुराल में ही रह रहे हैं। उनके अनुसार, खेत में लगी पानी की मोटर कानूनी तौर पर उनकी पत्नी के नाम पर दर्ज है। पहले वे अपने एक रिश्तेदार नवदीप सिंह के साथ सांझा तौर पर इस मोटर से खेतों की सिंचाई करते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से चल रहे आपसी विवाद के कारण उन्होंने नवदीप को पानी देने से इनकार कर दिया था। रजिंदर सिंह का आरोप है कि यह मामला पहले पुलिस और पंचायत स्तर पर भी गया था, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने आरोप लगाया कि शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के गांव प्रधान केवल सिंह और ब्लॉक प्रधान बीबी जसवीर कौर की अगुवाई में यूनियन कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर उनकी मोटर कोठी का ताला जबरन खुलवा दिया और कब्जा करने की कोशिश की। जब वे इसकी शिकायत लेकर थाना धनौला पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की, जिससे तंग आकर उन्हें परिवार सहित थाने के बाहर भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा। “25 साल से पानी ले रहे गरीब किसान को हक दिलाया”: किसान यूनियन दूसरी ओर, इस मामले में दखल देने वाली भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के नेताओं ने अपने रुख को सही ठहराया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि संबंधित किसान (नवदीप सिंह) पिछले करीब 25 वर्षों से लगातार उक्त मोटर से अपने खेतों के लिए पानी लेता आ रहा है। नेताओं ने साफ किया कि संगठन ने केवल एक जरूरतमंद और गरीब किसान को उसका हक दिलाने के लिए ही हस्तक्षेप किया है। उन्होंने दोहराया कि बीकेयू (उगराहां) हमेशा गरीब और छोटे किसानों के हितों की रक्षा करती आई है और किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। थाने के बाहर तनाव बरकरार, बातचीत का दौर जारी इस अनोखे धरने के कारण थाना धनौला के बाहर माहौल काफी गरमा गया है। एक तरफ जहाँ किसान यूनियन अपने फैसले पर अडिग है, वहीं दूसरी तरफ रिटायर्ड पुलिसकर्मियों का जत्था अपने साथी रजिंदर सिंह के पक्ष में लामबंद हो रहा है। पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दोनों पक्षों को बिठाकर आपसी बातचीत के जरिए समझौता कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक दोनों पक्षों के बीच कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी और पूर्व थानेदार का परिवार भूख हड़ताल पर डटा हुआ था।
