पंजाब-हरियाणा लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) नीति के विरोध में मोगा में वकीलों का आंदोलन 16वें दिन भी जारी रहा। मोगा बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्ता जिला कोर्ट परिसर में धरना दे रहे हैं और सरकार से इस नीति को तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वकीलों का कहना है कि प्रस्तावित LADC नीति अधिवक्ताओं के हितों के खिलाफ है। उनका मानना है कि यह नीति वकालत पेशे की स्वतंत्रता और गरिमा पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इसे वापस नहीं लेती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। अधिवक्ता भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे मोगा बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एडवोकेट रमेश ग्रोवर ने बताया कि पूरे पंजाब में वकीलों की हड़ताल चल रही है, जिसमें मोगा के अधिवक्ता भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी सहायता व्यवस्था का दुरुपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए किया जा रहा है। प्रशासनिक नियंत्रण पर भी गंभीर सवाल ग्रोवर के अनुसार, LADC को सरकारी वकील के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि कानूनी सहायता सेवाएं देने के बावजूद पारिश्रमिक स्वीकार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, न्यायिक अधिकारियों द्वारा LADC पर प्रशासनिक नियंत्रण भी गंभीर सवाल खड़े करता है। दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर आपत्तियां दर्ज एडवोकेट ग्रोवर ने कहा कि मामलों का कथित समन्वय, पुलिस अधिकारियों द्वारा कार्य की मांग और संस्थागत लक्ष्यों को पूरा करने जैसे पहलू विधि व्यवसाय की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित करते हैं। बार एसोसिएशन ने संबंधित समिति के समक्ष नीति में पारदर्शिता, जवाबदेही और इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। वकीलों ने सरकार से LADC नीति पर पुनर्विचार करने और उनकी चिंताओं का समाधान करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।