पाली के बांगड़ हॉस्पिटल से रविवार को किडनी की बीमारी से पीड़ित 20 साल के मरीज को 108 से जोधपुर रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि बीच रास्ते सिलेंडर से ऑक्सीजन खत्म हो गई। जब तक एम्बुलेंस ड्राइवर सिलेंडर मंगवाया तब तक मरीज की जान जा चुकी थी। बॉडी वापस बांगड़ हॉस्पिटल लाई गई। मृतक के परिजनों ने एम्बुलेंस चालक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बांगड़ हॉस्पिटल में हंगामा खड़ा कर दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। दरअसल पाली शहर के ट्रांसपोर्ट नगर नया गांव सांसी बस्ती निवासी 20 साल के सावन कुमार पुत्र सज्जन कुमार को किडनी की प्रॉब्लम होने पर चार दिन पहले पाली के बांगड़ हॉस्पिटल के ICU में भर्ती किया गया था। हालत गंभीर होने पर रविवार को उसे जोधपुर MDM हॉस्पिटल रेफर किया। 108 एम्बुलेंस से मरीज को लेकर जोधपुर रवाना हुए। बीच रास्ते ऑक्सीजन खत्म हो गई
मृतक के बड़े भाई देवाराम बताते है कि बीच रास्ते उसके भाई की तबीयत बिगड़ने लगी। देखा तो ऑक्सीजन नहीं आ रही थी। इस पर एम्बुलेंस ड्राइवर को बोला तो उसने कहा कि दूसरा सिलेंडर मंगवा लिया है। लेकिन ओम बन्ना के निकट पहुंचे ही थी कि उसके भाई की सांसें थम गई। उसने एम्बुलेंस ड्राइवर को बोला कि उसके भाई की मौत हो गई है। अब सिलेंडर बदलने से कोई मतलब नहीं। रोते हुए भाई की बॉडी वापस बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचे। एम्बुलेंस ड्राइवर की लापरवाही से उसके भाई की जान गई। मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर मृतक के परिजन बांगड़ हॉस्पिटल की मोर्चरी के बाहर बैठ गए। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल
पाली के बांगड़ हॉस्पिटल के मोर्चरी के बाहर मृतक के परिवार और समाज के महिला-पुरुष एकत्रित हो गए। महिलाओं का रो-रो कर बुरा हाल था। वे एम्बुलेंस में गैस सिलेंडर नहीं होने के कारण बेटे की मौत होने की बात कह रही थी। मृतक की मां लालीदेवी का तो रो-रो कर बुरा हाल था। छह महीने पहले बीमार हुआ सावन
मृतक के भाई देवाराम ने बताया करीब छह महीने पहले उसके भाई की दोनों किडनियों में समस्या हो गई। अब तक सिर्फ 10 बार उसका डाइलिसिस हुआ था। सप्ताह में दो बार उसे डाइलिसिस करवाने बांगड़ हॉस्पिटल लाते थे। चार दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर उसे बांगड़ हॉस्पिटल भर्ती करवाया था।
